रायपुर।छत्तीसगढ़ के पूर्व गृह मंत्री और वरिष्ठ भाजपा नेता ननकी राम कंवर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्य सचिव और लोक निर्माण विभाग (PWD) के सचिव को पत्र लिखकर सरकारी विभाग में भ्रष्टाचार और काले धन के आरोपों को लेकर बड़ा खुलासा किया है। पत्र में कंवर ने विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी पर नियम-विरुद्ध लाभ देने, मनमानी ठेकेदारों को फायदा पहुंचाने और लंबित मामलों में पक्षपात से बचने का आरोप लगाया है, साथ ही मामले की सीबीआई जांच की मांग की है।
भ्रष्टाचार के आरोप: नियम-विरुद्ध लाभ और पदोन्नति
कंवर ने अपने पत्र में PWD के मुख्य अभियंता विजय कुमार भतपहरी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने बताया कि भतपहरी ने विभाग में रहते हुए अपने चहेते ठेकेदारों को नियमों के विपरीत लाभ पहुंचाया और कमिशनखोरी के माध्यम से सरकारी कार्यों पर घोटाले को बढ़ावा दिया। ऐसे आरोपों का दावा करते हुए कंवर ने कहा है कि इससे विभाग की और शासन-प्रशासन की छवि को भारी नुकसान पहुंचा है।
पत्र में उल्लेख है कि भतपहरी के खिलाफ 2011 और 2015 में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण एवं एंटीकरप्शन ब्यूरो में प्रकरण दर्ज थे, लेकिन राजनैतिक समर्थन के कारण उन मामलों पर प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। कंवर ने इस मुद्दे को उठाते हुए आरोप लगाया कि भतपहरी को लंबे समय से पदोन्नति और लाभ प्राप्त होता रहा है, इसके बावजूद गंभीर आरोपों की जांच नहीं हुई और उन्हें अब भी उच्च पद पर काम करने की छूट मिली हुई है।

लंबित मामले और प्रभाव
पत्र में यह भी कहा गया है कि भतपहरी के खिलाफ कई गंभीर मामले लंबित हैं और डीपीसी बैठकों में नियमों की अवहेलना की गई है, जिसके कारण इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड गायब होने जैसे सवाल उठते हैं। इससे विभाग में काम कर रहे अन्य अभियंताओं और कर्मचारियों में अविश्वास और असंतोष का माहौल बना हुआ है।
कंवर ने पत्र में मांग की है कि भतपहरी को उनके पद से तत्काल हटाया जाए और दोनों वर्षों से लंबित मामलों सहित सभी मामलों की सीबीआई स्तर पर स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराई जाये। साथ ही उन्होंने PWD में हुए नुकसान की वसूली और जवाबदेही तय करने पर भी जोर दिया है।
राजनीतिक हलचल और प्रतिक्रिया
कंवर के इस कदम से छत्तीसगढ़ की राजनीति में हलचल मची हुई है। वरिष्ठ नेता होने के नाते उनके आरोपों को राजनीतिक और प्रशासनिक सर्कल में गंभीरता से देखा जा रहा है। इससे पूर्व भी वह राज्य में डीएमएफ (डोमिसाइल मैनेजमेंट फंड) के मुद्दे पर मुख्यमंत्री और केंद्र सरकार को पत्र लिख चुके हैं, जिसमें उन्होंने लगभग 10,000 करोड़ रुपये के कथित घोटाले की बात उठाई थी और जांच की मांग की थी।
बीते दिनों कंवर द्वारा पीएम मोदी को लिखा गया पत्र व्यापक चर्चा में रहा, जिसमें उन्होंने डीएमएफ फंड के उपयोग को लेकर भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए सीबीआई और ईडी से जांच करवाने की मांग की थी। इस पत्र के बाद राज्य कांग्रेस नेतृत्व ने भी सरकार पर सवालों की फौबंद जारी की थी, जिससे राजनीतिक विवाद और तेज हो गया था।
अनुभागीय मुद्दों से लेकर व्यापक राजनीतिक चुनौतियाँ
कंवर ने पत्र में यह भी उल्लेख किया था कि कुछ सरकारी परियोजनाओं जैसे पुल और सडक निर्माण के कामों को डीएमएफ जैसे विशेष फंड से कराया जा रहा है, जबकि नियमों के अनुसार ऐसे फंडों का उपयोग विशेष उद्देश्यों के लिये होना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि इन फंडों का दुरुपयोग हो रहा है और कई विभागों में भ्रष्टाचार का नेटवर्क मौजूद है।
आगे की कार्रवाई की उम्मीद
पत्र में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि मोदी सरकार, केंद्रीय गृह मंत्रालय और जांच एजेंसियों को मामले का संज्ञान लेना चाहिए और दोषियों की पहचान के लिये उचित जांच शुरू करनी चाहिए। राजनीतिक और प्रशासनिक दायरों में अब यह प्रतीक्षा है कि पत्र के बाद केंद्र या राज्य सरकार किस प्रकार की कार्रवाई करती है और क्या इस मामले की सीबीआई जांच शुरू होती है या नहीं।

