छत्तीसगढ़ में सरकारी विज्ञापन और जनसंपर्क व्यय को लेकर एक बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। सूचना का अधिकार (RTI) के तहत सामने आई जानकारी के अनुसार छत्तीसगढ़ शासन के जनसंपर्क विभाग ने अप्रैल 2024 से दिसंबर 2024 के बीच ‘लाइमलाइट कॉर्प’ नामक संस्था को कुल 3 करोड़ 93 लाख रुपए का भुगतान किया है।
इस चौंकाने वाले खुलासे को कुनाल शुक्ला, जो कि छत्तीसगढ़ में सक्रिय सामाजिक कार्यकर्ता (एक्टिविस्ट) हैं, ने अपने फेसबुक पोस्ट के माध्यम से सार्वजनिक किया है।
सवालों में ‘लाइमलाइट कॉर्प’ की हैसियत
कुणाल शुक्ला ने अपने पोस्ट में दावा किया है कि जिस ‘लाइमलाइट कॉर्प’ को करोड़ों रुपए का भुगतान किया गया, उसकी डिजिटल मौजूदगी बेहद सीमित है।
यूट्यूब चैनल पर सिर्फ 139 सब्सक्राइबर
कुल 57 वीडियो, न तो कोई बड़ा दर्शक वर्ग, न ही व्यापक प्रभाव…..ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि आखिर ऐसा कौन-सा असाधारण काम ‘लाइमलाइट कॉर्प’ ने किया, जिसके बदले उसे करीब 4 करोड़ रुपए का भुगतान किया गया?
जनसंपर्क विभाग की भूमिका पर सवाल
सरकारी विज्ञापनों और प्रचार के नाम पर जनता के टैक्स के पैसों का इस तरह इस्तेमाल होना कई सवालों को जन्म देता है।क्या किसी प्रभावशाली व्यक्ति या नेटवर्क दबाव में यह राशि जारी हुई?, क्या जनसंपर्क विभाग ने काम की वास्तविक पहुंच और प्रभाव का कोई आकलन किया?
चुप्पी साधे प्रशासन
इस पूरे मामले पर अब तक जनसंपर्क विभाग या राज्य सरकार की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
हालांकि, RTI दस्तावेज सार्वजनिक होने के बाद यह मुद्दा सोशल मीडिया पर तेजी से चर्चा में है और लोग जवाब मांग रहे हैं।
अब निगाहें जांच पर
यह मामला केवल एक कंपनी के भुगतान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सरकारी तंत्र में पारदर्शिता, जवाबदेही और भ्रष्टाचार जैसे बड़े सवालों से जुड़ा है। अब देखना यह होगा कि सरकार इस पर सफाई देती है या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।
जनता पूछ रही है — 139 सब्सक्राइबर की ‘लाइमलाइट’ आखिर किसके लिए चमक रही थी?


