जगदलपुर।बस्तर की समृद्ध आदिवासी संस्कृति, परंपरा और विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने वाले संभाग स्तरीय बस्तर पंडुम 2026 का भव्य समापन जगदलपुर में हुआ। इस अवसर पर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बस्तर अंचल की सांस्कृतिक धरोहर को जीवंत रखने वाले कलाकारों, शिल्पियों और पारंपरिक विधाओं से जुड़े प्रतिभागियों को सम्मानित किया।
कार्यक्रम में जनजातीय समाज की 12 प्रमुख विधाओं—नृत्य, गीत, नाटक, साहित्य, व्यंजन, पेय पदार्थ, वन औषधि, वेशभूषा, आभूषण, चित्रकला, वाद्ययंत्र और शिल्प—में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विजेता दलों को प्रथम पुरस्कार के रूप में 50-50 हजार रुपए के चेक और स्मृति चिन्ह प्रदान किए गए।
आदिवासी परंपरा और पहचान का जीवंत मंच बना बस्तर पंडुम
बस्तर पंडुम केवल एक सांस्कृतिक आयोजन नहीं, बल्कि आदिवासी समाज की आत्मा, जीवनशैली और परंपरागत ज्ञान का उत्सव है। इस आयोजन ने यह सिद्ध किया कि बस्तर की लोकसंस्कृति आज भी उतनी ही जीवंत और सशक्त है, जितनी सदियों पहले थी।
कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि बस्तर की संस्कृति भारत की सांस्कृतिक विविधता का अनमोल हिस्सा है और ऐसे आयोजनों के माध्यम से इसे संरक्षित और प्रोत्साहित किया जाना अत्यंत आवश्यक है। वहीं मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बस्तर पंडुम को जनजातीय प्रतिभाओं के सम्मान और आत्मसम्मान का प्रतीक बताया।
12 विधाओं में प्रथम पुरस्कार प्राप्त करने वाले प्रतिभागी
संभाग स्तरीय बस्तर पंडुम 2026 में विभिन्न विधाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को प्रथम पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
जनजातीय नृत्य विधा में गौर माड़िया नृत्य की प्रभावशाली प्रस्तुति देने वाले बुधराम सोढ़ी (जिला दंतेवाड़ा) ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। उनकी प्रस्तुति ने दर्शकों को पारंपरिक आदिवासी जीवन की झलक दिखाई।
जनजातीय गीत की श्रेणी में पालनार दल, मंगली एवं साथी (जिला दंतेवाड़ा) को प्रथम पुरस्कार मिला। दल ने पारंपरिक गीतों के माध्यम से आदिवासी समाज की भावनाओं और संघर्षों को स्वर दिया।
जनजातीय नाट्य में लेखम लखा (जिला सुकमा) ने अपनी सशक्त प्रस्तुति से निर्णायकों को प्रभावित किया। नाटक के माध्यम से सामाजिक संदेश और परंपरागत जीवन मूल्यों को दर्शाया गया।
जनजातीय वाद्ययंत्र प्रदर्शन में रजऊ मंडवी एवं साथी (जिला कोंडागांव) को प्रथम पुरस्कार प्रदान किया गया। उनके वाद्ययंत्रों की धुनों ने पूरे पंडाल को लोकसंगीत की लय में बांध दिया।
जनजातीय वेशभूषा विधा में गुंजन नाग (जिला सुकमा) ने पारंपरिक परिधानों और उनकी ऐतिहासिक महत्ता को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया।जनजातीय आभूषण प्रदर्शन में सुदनी दुग्गा (जिला नारायणपुर) को प्रथम पुरस्कार मिला, जिन्होंने आदिवासी आभूषणों की कलात्मकता और सांस्कृतिक पहचान को उजागर किया।जनजातीय शिल्प कला में ओमप्रकाश गावड़े (कोया आर्ट्स), जिला कांकेर ने अपनी विशिष्ट शिल्पकला से प्रथम स्थान प्राप्त किया।
समापन अवसर पर अन्य विधाओं के विजेता
समापन समारोह के दौरान शेष विधाओं के विजेताओं को भी सम्मानित किया गया।जनजातीय चित्रकला में दीपक जुर्री (जिला कांकेर) ने प्रथम पुरस्कार प्राप्त किया। उनकी चित्रकला में प्रकृति, परंपरा और आदिवासी जीवन की गहरी छाप देखने को मिली।जनजातीय पेय पदार्थ विधा में भैरम बाबा समूह, उर्मिला प्रधान (जिला बीजापुर) को प्रथम पुरस्कार प्रदान किया गया।जनजातीय व्यंजन विधा में ताराबती (जिला दंतेवाड़ा) ने पारंपरिक स्वाद और पोषण से भरपूर व्यंजनों की प्रस्तुति देकर प्रथम स्थान हासिल किया।आंचलिक साहित्य विधा में उत्तम नाईक (जिला कोंडागांव) को उनकी साहित्यिक प्रस्तुति के लिए प्रथम पुरस्कार मिला।बस्तर वन औषधि विधा में राजदेव बघेल (जिला बस्तर) ने पारंपरिक औषधीय ज्ञान को प्रस्तुत कर प्रथम पुरस्कार प्राप्त किया।
अन्य पुरस्कार और प्रोत्साहन राशि
बस्तर पंडुम 2026 में केवल प्रथम पुरस्कार ही नहीं, बल्कि अन्य प्रतिभागियों को भी सम्मानित किया गया।द्वितीय पुरस्कार के रूप में प्रत्येक विजेता को 30-30 हजार रुपए और तृतीय पुरस्कार के रूप में 20-20 हजार रुपए के चेक प्रदान किए गए।इसके अतिरिक्त, प्रतियोगिता में भाग लेने वाले शेष 48 प्रतिभागी दलों को प्रोत्साहन स्वरूप 10-10 हजार रुपए के चेक देकर सम्मानित किया गया, ताकि उनकी प्रतिभा को आगे बढ़ने का अवसर मिले।
बस्तर पंडुम: संस्कृति संरक्षण की दिशा में मजबूत पहल
बस्तर पंडुम 2026 ने यह स्पष्ट कर दिया कि जनजातीय संस्कृति केवल अतीत की धरोहर नहीं, बल्कि वर्तमान और भविष्य की भी अमूल्य संपदा है। यह आयोजन न केवल कलाकारों को मंच प्रदान करता है, बल्कि नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का कार्य भी करता है।कार्यक्रम के समापन पर उपस्थित जनसमूह, कलाकारों और अतिथियों ने बस्तर पंडुम को हर वर्ष और अधिक व्यापक रूप देने की आवश्यकता पर जोर दिया।

