छत्तीसगढ़ में भूमि से जुड़े एक बड़े प्रशासनिक सुधार का ऐलान किया गया था, जिसे ग्रामीण और शहरी दोनों स्तरों पर एक बड़ा लाभकारी बदलाव माना जा रहा था। लेकिन, जैसे ही यह बदलाव लागू होने वाला था, वह राजपत्र में प्रकाशित होकर मज़ाक बन गया और आम जनता के लिए परेशानी का कारण बन गया। समस्या सिर्फ नीति घोषणाओं तक सीमित नहीं रही बल्कि ऑनलाइन आवेदन प्रणाली के लिए सॉफ्टवेयर तैयार न होने के कारण लोग लंबे समय से भटक रहे हैं और लाभ लेने में असमर्थ हैं।
भूमि डायवर्सन का महत्व और पिछला सिस्टम
भूमि डायवर्सन (Land Diversion) का तात्पर्य होता है भूमि के उपयोग को एक श्रेणी से हटाकर दूसरी श्रेणी में बदलना — जैसे कृषि भूमि को आवासीय/औद्योगिक उपयोग के लिए बदलना। छत्तीसगढ़ में पहले यह प्रक्रिया एक सक्षम अधिकारी, खासकर एसडीएम (उप संचालक, राजस्व विभाग) के पास थी। इस प्रक्रिया में लोग सीधे एसडीएम कार्यालय जाकर आवेदन करते थे। हालांकि यह प्रक्रिया आम लोगों के लिए उपलब्ध थी, यहां लंबी पंक्तियाँ, भेंटपूजा, रिश्वत और घंटों का इंतज़ार आम बात थी, जिससे जनता को अधिक पीड़ा होती थी।
सरकार का सुधारात्मक निर्णय और नोटिफिकेशन
दिसंबर 2025 में राज्य सरकार ने भूमि डायवर्सन से जुड़े इस सिस्टम में बड़े सुधार की घोषणा की। सरकार का उद्देश्य था भू-राजस्व प्रणाली को सरल बनाना, भ्रष्टाचार को रोकना, और आम जनता को सुविधा देना। इसके तहत दिसंबर माह में राजस्व विभाग द्वारा राजपत्र में एक नोटिफिकेशन प्रकाशित किया गया, जिसमें यह स्पष्ट किया गया कि अब भूमि डायवर्सन के लिए सक्षम अधिकारी की अनुमति की आवश्यकता नहीं होगी और लोग सीधे ही आवेदन कर सकते हैं।
इस नोटिफिकेशन के प्रकाशित होते ही, एसडीएम का डायवर्सन पर अधिकार स्वतः समाप्त हो गया। प्रशासनिक दृष्टि से यह बड़ा कदम था, क्योंकि डायवर्सन का अधिकार हटने के बाद अधिकारियों के दखल की संभावना कम हो जाती और लोग प्रक्रिया में अधिक स्वतंत्रता पा सकते थे।
सॉफ्टवेयर तैयार न होना — बड़ा प्रशासनिक दांवपेंच
जहाँ एक तरफ यह सुधारात्मक निर्णय लागू हुआ, वहीं राजस्व विभाग ने इस बदलाव के लिए आवश्यक ऑनलाइन सॉफ्टवेयर तैयार नहीं किया। आज लगभग डेढ़ महीने का समय बीत चुका है, लेकिन डायवर्सन के लिए कोई पोर्टल या टेक्निकल सिस्टम अभी तक बाजार में नहीं आया।
अब समस्या यह है कि पुराने सिस्टम में डायवर्सन के लिए केवल एसडीएम से अनुमति लेनी होती थी, लेकिन जैसे ही अधिकार हट गया, एसडीएम अधिकारियों के पास यह आवेदन ही नहीं पहुंच पा रहा है। इसके कारण जनता भटक रही है, न तो पुराने सिस्टम के तहत आवेदन कर पा रही है, और न ही नए सिस्टम के लिए कोई तकनीकी समाधान उपलब्ध है।
लोगों की हालत: आवेदन के लिए भटकना, शिकायतें और निराशा
राजस्व विभाग के अधिकारियों के इस रवैये से लोकसभा स्तर तक प्रश्न उठने लगे हैं। आम लोगों का कहना है कि जब तक सॉफ्टवेयर तैयार नहीं था, तब तक ऐसा आदेश क्यों लागू किया गया? क्या पहले से कोई योजना या पोर्टल तैयार था? अगर नहीं, तो क्या अधिकारियों ने प्रशासनिक निर्णय के क्रियान्वयन में जल्दबाजी की?
ग्राम स्तर से लेकर शहरों तक अनेक लोग रोजाना एसडीएम कार्यालयों में दिखाई देते हैं, लेकिन अब उनके आवेदन स्वीकार नहीं किए जाते क्योंकि प्राधिकृत अधिकारी को अधिकार ही नहीं रहा। ऐसे में जनता का कहना है कि सरकार ने बड़ा सुधार घोषित तो कर दिया, लेकिन संरचना तैयार नहीं की, जिससे वह वास्तविक रूप से लागू हो सके।
लापरवाही और प्रशासनिक सवाल
राजस्व विभाग की लापरवाही पर सवाल उठे हैं कि….जब सॉफ्टवेयर तैयार नहीं था, तब अधिकार समाप्त क्यों किया गया?क्या यह निर्णय जल्दबाजी में लिया गया?क्या किसी दबाव या लॉबी के कारण इस निर्णय का कार्यान्वयन रोका गया?
कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे निर्णय पहले तकनीकी आधार पर किए जाने चाहिए, ताकि लागू होने के बाद जनता को सुविधा मिले, न कि परेशानी।
राजपत्र में क्या लिखा गया था?
जारी राजपत्र में स्पष्ट रूप से उल्लेख था कि भूमि डायवर्सन के लिए सक्षम प्राधिकारी की अनुमति आवश्यक नहीं होगी यदि भूमि निर्धारित क्षेत्रों में आती है, जैसे — नगर निगम, नगरपालिका, नगर पंचायत, ग्रामीण क्षेत्र की भूमि आदि। इस नियम से एक गहरी प्रशासनिक सरलता अपेक्षित थी।
हालाँकि, नोटिफिकेशन में साफ्टवेयर व पोर्टल का कोई जिक्र नहीं था, जो आवेदन को डिजिटल रूप से संसाधित कर सके। इसी वजह से यह राजपत्र आज जनता के लिए व्यावहारिक रूप से बेकार साबित हुआ।
राज्य सरकार की संभावित प्रतिक्रिया
अब सरकार के सामने यह चुनौती बड़ी है कि वह इस समस्या का जल्दी समाधान करे। सॉफ्टवेयर निर्माण को प्राथमिकता देकर आवेदन प्रणाली को जल्द से जल्द लाइव करना जरूरी है। कई अन्य राज्यों में पहले से ऐसे पोर्टल बनने के कारण डायवर्सन की प्रक्रिया ऑनलाइन आसानी से हो जाती है। छत्तीसगढ़ सरकार को भी इसी दिशा में तेज़ी से कदम उठाने होंगे ताकि आम जनता को लाभ मिल सके।
कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया है कि सरकार ने एक नया निर्णय लिया है और ऑनलाइन डायवर्सन प्रक्रिया को पूरी तरह वैधानिक रूप से लागू करने की व्यवस्था कर दी है, जिसमें आवेदन घर बैठे ऑनलाइन किए जा सकेंगे और 15 दिन के भीतर आदेश जारी किया जाएगा।
छत्तीसगढ़ सरकार ने भूमि डायवर्सन को सरल और भ्रष्टाचार मुक्त बनाने का एक अच्छा निर्णय लिया, लेकिन अपर्याप्त योजना और तकनीकी तैयारियों के कारण यह निर्णय जनता के लिए परेशानी का सबब बन गया है।
एक तरफ अधिकार समाप्त हुआ, वहीं तकनीकी ढांचा तैयार नहीं हुआ।जनता अब आवेदन के लिए भटक रही है।प्रशासनिक लापरवाही पर सवाल उठ रहे हैं।
सरकार के लिए यह चुनौती है कि वह तुरंत ऑनलाइन सॉफ्टवेयर लॉन्च करे और इस गड़बड़ी का समाधान करे, ताकि भूमि डायवर्सन की प्रक्रिया वास्तव में सरल और पारदर्शी हो सके।

