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छत्तीसगढ़ में हिट-एंड-रन का मामला: भाजपा विधायक के बेटे की गिरफ्तारी, जमानत पर रिहाई से उठा सवाल

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छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में सामने आए हिट-एंड-रन मामले ने एक बार फिर वीआईपी मामलों में कानून की कार्रवाई को लेकर बहस छेड़ दी है। इस मामले में भारतीय जनता पार्टी के एक विधायक के बेटे की गिरफ्तारी और फिर जल्द जमानत मिलने की खबर चर्चा में है।

यह मामला रायपुर के तेलीबांधा थाना क्षेत्र का है, जहां देर रात एक तेज रफ्तार कार ने बाइक सवार युवक को टक्कर मार दी। टक्कर इतनी जोरदार थी कि बाइक सवार सड़क पर गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गया।घटना के बाद कार चालक मौके पर नहीं रुका और दूसरी गाड़ी से वहां से फरार हो गया। स्थानीय लोगों ने घायल युवक को तत्काल अस्पताल पहुंचाया, जहां उसकी हालत गंभीर बताई जा रही है।

पुलस जांच में सामने आया कि कार चलाने वाला युवक छत्तीसगढ़ के एक भाजपा विधायक का बेटा है। घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की।पुलिस के अनुसार यह दुर्घटना देर रात लगभग एक बजे के आसपास सलसर चौक के पास हुई। घायल युवक की पहचान त्रिभुवन सिंह के रूप में हुई है, जो पेशे से ट्रैफिक डिस्क जॉकी बताया जा रहा है।

मामले की जांच के दौरान यह भी सामने आया कि घटना स्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरे कथित तौर पर काम नहीं कर रहे थे। इससे पुलिस को प्रत्यक्ष वीडियो साक्ष्य जुटाने में परेशानी हुई।हालांकि, पुलिस ने अन्य तकनीकी और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर आरोपी की पहचान की और उसे गिरफ्तार किया। गिरफ्तारी के बाद आरोपी को थाने लाया गया और कानूनी प्रक्रिया पूरी की गई।

आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की लापरवाही से वाहन चलाने और दूसरों की जान को खतरे में डालने से संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया। ये धाराएं जमानती प्रकृति की बताई जा रही हैं।इसी कारण गिरफ्तारी के कुछ ही समय बाद आरोपी को जमानत मिल गई। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि कानून के तहत जो प्रावधान हैं, उसी के अनुसार कार्रवाई की गई है।

इस पूरे मामले में पीड़ित पक्ष की ओर से सख्त कार्रवाई की मांग की जा रही है। परिजनों का कहना है कि यदि आरोपी कोई आम व्यक्ति होता तो शायद कार्रवाई का तरीका अलग होता।वहीं, विपक्षी दलों ने भी इस घटना को लेकर सरकार और प्रशासन पर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि रसूखदारों के मामलों में कानून नरमी बरतता है।पुलिस का कहना है कि मामले की जांच अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है और यदि आगे कोई ठोस सबूत सामने आता है तो कार्रवाई और कड़ी की जा सकती है।

इस घटना ने एक बार फिर सड़क सुरक्षा, तेज रफ्तार और हिट-एंड-रन मामलों में सख्ती की जरूरत को उजागर किया है। आए दिन ऐसी घटनाएं सामने आ रही हैं, लेकिन दोषियों को सजा मिलना दुर्लभ होता जा रहा है।रायपुर जैसे बड़े शहरों में देर रात तेज रफ्तार वाहन और लापरवाही आम समस्या बनती जा रही है। इसके बावजूद प्रभावी निगरानी और सख्त दंड का अभाव दिखाई देता है।

फिलहाल, यह मामला राजनीतिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बना हुआ है। सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि आगे की जांच में पुलिस कितनी निष्पक्ष और सख्त कार्रवाई करती है।

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