छत्तीसगढ़ पुलिस की वरिष्ठ अधिकारी डीएसपी कल्पना वर्मा के निलंबन ने प्रदेश की राजनीति और प्रशासनिक गलियारों में हलचल मचा दी है। एक ओर जहां सरकार का कहना है कि यह कार्रवाई प्रारंभिक जांच रिपोर्ट के आधार पर की गई है, वहीं दूसरी ओर यह मामला निजी रिश्तों, कथित ‘लव ट्रैप’, भारी वित्तीय लेन-देन और सरकारी पद के दुरुपयोग जैसे गंभीर आरोपों से जुड़ गया है। सवाल अब यह है कि क्या यह केवल निलंबन तक सीमित रहेगा या फिर डीएसपी कल्पना वर्मा की नौकरी पर भी संकट आ सकता है।
निलंबन का आदेश और सरकारी कार्रवाई
छत्तीसगढ़ सरकार के गृह (पुलिस) विभाग ने 5 फरवरी 2026 को डीएसपी कल्पना वर्मा को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। निलंबन आदेश में कहा गया कि प्रथम दृष्टया उनके आचरण को “सरकारी सेवा के अनुरूप नहीं” पाया गया है। निलंबन के दौरान उनका मुख्यालय राज्य पुलिस मुख्यालय तय किया गया है और उन्हें विभागीय जांच में सहयोग करने के निर्देश दिए गए हैं।कल्पना वर्मा उस समय दंतेवाड़ा जिले में डीएसपी के पद पर पदस्थ थीं। निलंबन के साथ ही उन्हें फील्ड पोस्टिंग से हटा दिया गया है।
शिकायत की शुरुआत: कारोबारी दीपक टंडन का आरोप
इस पूरे मामले की शुरुआत रायपुर के कारोबारी दीपक टंडन की शिकायत से हुई। दीपक टंडन ने आरोप लगाया कि डीएसपी कल्पना वर्मा ने उनसे नजदीकी संबंध बनाए और फिर कथित तौर पर उन्हें भावनात्मक रिश्ते (लव ट्रैप) में फंसाकर भारी रकम ऐंठी।
शिकायत के अनुसार, दीपक टंडन से लगभग 2 करोड़ रुपये से अधिक की नकद राशि, महंगी कारें, गहने और अन्य कीमती उपहार लिए गए। आरोप यह भी है कि जब कारोबारी ने पैसे लौटाने या संबंध खत्म करने की बात कही, तो उसे ब्लैकमेल किया गया।
व्हाट्सएप चैट और सीसीटीवी फुटेज
मामले को उस समय और तूल मिला जब सोशल मीडिया पर व्हाट्सएप चैट्स और कुछ सीसीटीवी फुटेज वायरल हुए। इन चैट्स को शिकायतकर्ता ने अपने आरोपों के समर्थन में पेश किया। हालांकि इन डिजिटल सबूतों की प्रामाणिकता की पुष्टि जांच का विषय है, लेकिन इन्हीं तथ्यों के आधार पर सरकार ने प्रारंभिक जांच करवाई।
प्रारंभिक जांच में क्या सामने आया?
सरकार ने इस मामले की प्रारंभिक जांच एक अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ASP) स्तर के अधिकारी से करवाई। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह जांच रिपोर्ट काफ़ी विस्तृत थी और इसमें सैकड़ों पन्नों के दस्तावेज शामिल थे।
प्रारंभिक जांच में जो प्रमुख बिंदु सामने आए, वे इस प्रकार हैं—डीएसपी रहते हुए निजी व्यक्ति से असामान्य वित्तीय लेन-देन,सरकारी पद की गरिमा के विपरीत निजी संबंध,आय के ज्ञात स्रोतों की तुलना में अधिक खर्च और संपत्ति के संकेत,कुछ मामलों में संवेदनशील पुलिस जानकारी साझा करने की आशंका,इन्हीं तथ्यों को आधार बनाकर सरकार ने यह माना कि अधिकारी का आचरण “conduct unbecoming of a government servant” की श्रेणी में आता है।
कल्पना वर्मा का पक्ष
डीएसपी कल्पना वर्मा ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को निराधार और साजिशपूर्ण बताया है। उनका कहना है कि यह मामला निजी और व्यावसायिक लेन-देन से जुड़ा है, जिसे जानबूझकर ‘लव ट्रैप’ का रूप दिया गया है।
उनका दावा है कि शिकायतकर्ता उन्हें बदनाम करने की कोशिश कर रहा है और वे जांच में पूरा सहयोग करेंगी। कल्पना वर्मा ने यह भी कहा है कि सोशल मीडिया पर वायरल हो रही सामग्री को संदर्भ से हटकर पेश किया गया है।
निलंबन का मतलब क्या नौकरी चली गई?
यह सवाल सबसे ज्यादा चर्चा में है कि क्या डीएसपी कल्पना वर्मा की नौकरी अब खतरे में है। प्रशासनिक नियमों के अनुसार, निलंबन का अर्थ बर्खास्तगी नहीं होता। यह एक अस्थायी प्रशासनिक कार्रवाई है, ताकि निष्पक्ष जांच हो सके।
निलंबन के दौरान—
अधिकारी सेवा में बनी रहती हैं
उन्हें नियमानुसार निर्वाह भत्ता (subsistence allowance) मिलता है
विभागीय जांच पूरी होने तक वे सक्रिय पद पर काम नहीं करतीं
आगे की प्रक्रिया क्या होगी?
अब इस मामले में विभागीय जांच (डिसिप्लिनरी इन्क्वायरी) की संभावना है। यदि जांच में आरोप साबित होते हैं, तो संभावित कार्रवाई में शामिल हो सकता है—वेतनवृद्धि रोकना,पदावनत लंबी अवधि का निलंबन या गंभीर स्थिति में सेवा से बर्खास्तग,वहीं यदि आरोप सिद्ध नहीं होते, तो डीएसपी कल्पना वर्मा को सम्मानपूर्वक बहाल भी किया जा सकता है।
राजनीतिक और प्रशासनिक हलचल
इस मामले ने राजनीतिक हलकों में भी बहस छेड़ दी है। विपक्ष ने सरकार से पारदर्शी और निष्पक्ष जांच की मांग की है, वहीं सत्तापक्ष का कहना है कि कानून सभी के लिए समान है और पद चाहे कितना भी बड़ा क्यों न हो, नियमों से ऊपर नहीं हो सकता।
डीएसपी कल्पना वर्मा का निलंबन केवल एक प्रशासनिक आदेश नहीं, बल्कि यह मामला निजी रिश्तों, सार्वजनिक पद की जिम्मेदारी और कानून के दायरे को लेकर एक बड़ा उदाहरण बन गया है। फिलहाल न तो उन्हें दोषी ठहराया जा सकता है और न ही निर्दोष। सच्चाई जांच के बाद ही सामने आएगी।
इतना तय है कि यह मामला आने वाले समय में छत्तीसगढ़ प्रशासन और पुलिस व्यवस्था के लिए एक अहम परीक्षा साबित होगा—जहां निष्पक्षता, कानून और नैतिकता तीनों की कसौटी पर फैसला होगा।
डीएसपी कल्पना वर्मा निलंबित: ‘लव ट्रैप’ से लेकर वित्तीय अनियमितताओं तक, पूरा मामला क्या है और आगे क्या होगा?


