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दंतेश्वरी मंदिर चोरी कांड के बाद प्रशासन सख्त, सुरक्षा के लिए बदली जाएगी पूरी व्यवस्था

छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र में स्थित दंतेश्वरी माता का प्रसिद्ध मंदिर एक गंभीर चोरी की घटना के कारण चर्चा में आ गया है। यह मंदिर न सिर्फ धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि यहाँ प्रतिदिन सैकड़ों श्रद्धालु पूजा-अर्चना और दान देने के लिए आते हैं। लेकिन हाल ही में हुई चोरी की घटना ने न केवल भक्तों के दिलों को झकझोरा है, बल्कि प्रशासन की सुरक्षा नीतियों पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। इस घटना के बाद मंदिर प्रशासन और स्थानीय नेतृत्व ने सुरक्षा को मजबूत करने के लिए बड़े फैसले लिए हैं, जिनका उद्देश्य अब भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति को रोकना है।

चोरी की घटना — कैसे हुई और क्या खोया गया?

करीब एक सप्ताह पहले दंतेश्वरी माता मंदिर में देर रात चोरी की वारदात सामने आई। चोरों ने मंदिर के पीछे बने पुराने लकड़ी के दरवाज़े का ताला तोड़ा और उसमें से माता के सोने तथा चांदी के कीमती आभूषण चुरा लिए। स्थानीय पुलिस और सीसीटीवी फुटेज की जांच के अनुसार चोरी रात के लगभग आधी रात के बाद हुई थी जब मंदिर परिसर शांत था और सुरक्षा गार्ड वहां मौजूद नहीं थे।

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, चोरी में चोरों ने लगभग लाखों रुपये मूल्य के हार, चेन और अन्य जेवरात ले लिए। मंदिर की सीसीटीवी कैमरों में चोरी करते हुए चोर कैद भी हुआ है, लेकिन उसका चेहरा साफ दिखाई नहीं दे रहा है। पुलिस अब अन्य आसपास के सीसीटीवी फुटेज और सुराग के आधार पर आरोपियों की पहचान करने की कोशिश कर रही है।

इस घटना ने न केवल मंदिर प्रशासन को हैरान किया बल्कि श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों में भारी रोष उत्पन्न कर दिया। भक्तों का कहना है कि देवी के घर में चोरी होना एक गंभीर विषय है, और इससे न केवल आस्था को चोट पहुंची है बल्कि सुरक्षा व्यवस्था की गंभीरता पर भी सवाल खड़े हुए हैं।

स्थानीय प्रशासन की प्रतिक्रिया

चोरी की घटना के बाद स्थानीय विधायक किरण सिंह देव सहित प्रशासन के कई वरिष्ठ अधिकारी मंदिर पहुंचे। उन्होंने मंदिर की वर्तमान सुरक्षा व्यवस्था का निरीक्षण किया और पाया कि पुराने लकड़ी के दरवाज़े बेहद कमजोर हो चुके थे। चोरों ने इन्हीं दरवाज़ों को आसानी से तोड़कर चोरी को अंजाम दिया था।

निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने कहा कि मंदिर के प्रवेश द्वारों और सुरक्षा व्यवस्था में सुधार करना अत्यंत आवश्यक है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों। उन्होंने यह भी बताया कि सिर्फ पुलिस जांच और आरोपियों की गिरफ़्तारी ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि मंदिर की संरचना और सुरक्षा ढांचे को भी प्रबल करना होगा।

घटना के बाद यह फैसला लिया गया है कि:

🔸 मंदिर के पुराने लकड़ी के दरवाज़ों को हटाकर उनकी जगह मजबूत लोहे की मोटी परतों से बने प्रवेश द्वार लगाए जाएंगे।

🔸 पुराने “चैनल गेट” को भी और अधिक मजबूती के साथ पुनः स्थापित किया जाएगा।

🔸 इस पुर्ननिर्माण कार्य पर लगभग ₹25 लाख का खर्चा अनुमानित है, जिसे शासन स्तर पर मंज़ूरी के लिए भेजा जा रहा है।

🔸 साथ ही मंदिर परिसर में सीसीटीवी कैमरों की संख्या बढ़ाने और उचित निगरानी तैनात करने की भी योजना बनाई जा रही है।

यह एक बड़ा कदम माना जा रहा है क्योंकि अब प्रवेश तक का मार्ग भी अत्यधिक सुरक्षित बनेगा। इससे न केवल चोरी पर रोक लगेगी बल्कि चोरों में भी भविष्य में डर का भाव आएगा।

पुलिस की वर्तमान स्थिति और जांच

मंदिर में हुई चोरी की घटना की सूचना मिलते ही पुलिस ने तुरंत जांच शुरू कर दी थी। सीसीटीवी फुटेज को जब्त कर उसके आधार पर संदिग्धों की पहचान की कोशिश हो रही है। हालांकि मामला काफी समय बीतने के बाद भी आरोपी नहीं पकड़ाया गया है, लेकिन पुलिस अपनी जांच जारी रखे हुए है।

कुछ मीडिया रिपोर्टों के अनुसार पुलिस ने 100 से अधिक सीसीटीवी फुटेज की समीक्षा, 9 विशेष टीमों का गठन, और इनाम की घोषणा भी की है। इसके बावजूद चोर अभी तक गिरफ्त में नहीं आया है, जिससे स्थानीय जनता में पुलिस की कार्रवाई की गति पर सवाल उठ रहे हैं।

भक्तों और स्थानीय लोगों की भावनाएं

इस चोरी की घटना के बाद पूरे बस्तर में चिंता और आक्रोश की भावना फैल गई है। भक्तों को यह बात स्वीकार्य नहीं है कि माता के घर में चोरी जैसी घटना हो सकती है। कई लोगों ने मंदिर प्रशासन और पुलिस से तेजी से आरोपी को पकड़ने और न्याय दिलाने की मांग की है।

स्थानीय व्यवसायियों और मंदिर के आसपास रहने वाले लोगों का कहना है कि मंदिर केवल एक पूजा स्थल नहीं बल्कि पूरे क्षेत्र की पहचान है। इसलिए इसकी सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी चाहिए।

धार्मिक स्थलों पर सुरक्षा का व्यापक मुद्दा

देशभर में धार्मिक स्थलों पर चोरी की घटनाएं अलग-अलग राज्यों से सामने आती रहती हैं। कभी मंदिर से घंटियां चोरी होती हैं, कभी पूजा सामग्री और कभी कीमती आभूषण। इन घटनाओं से यह स्पष्ट होता है कि धार्मिक स्थलों की सुरक्षा पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है, खासकर उन स्थलों पर जहाँ बड़ी संख्या में भक्त आते हैं और सामूहिक आस्था का केंद्र होते हैं। इसलिए दंतेश्वरी मंदिर में सुरक्षा बढ़ाने का निर्णय सिर्फ स्थानीय मंदिर ही नहीं, बल्कि पूरे देश के धार्मिक स्थलों के लिए एक मिसाल बन सकता है।

दंतेश्वरी मंदिर में हुई चोरी की घटना ने स्पष्ट रूप से दिखाया कि पारंपरिक सुरक्षा व्यवस्थाएँ अब समय की मांग के अनुरूप नहीं हैं। इसके मद्देनज़र मंदिर प्रशासन, स्थानीय विधायक और सरकार ने सक्रिय कदम उठाते हुए लोहे के मजबूत दरवाज़ों, सुधरी हुई सीसीटीवी निगरानी, और बेहतर सुरक्षा प्रणाली लागू करने का निर्णय लिया है।

इस कदम से न केवल भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने में मदद मिलेगी बल्कि श्रद्धालुओं का विश्वास भी दोबारा मजबूत होगा। ऐसे प्रयासों से यह संदेश जाएगा कि धर्मस्थलों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है और आस्था के केंद्रों को कोई भी खतरा नहीं सहन किया जाएगा।

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