छत्तीसगढ़ में भारत **स्काउट्स एंड गाइड्स की राष्ट्रीय रोवर-रेंजर जम्बूरी आयोजन को लेकर बड़ा विवाद उभर गया है, जिसमें वरिष्ठ भाजपा सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने आयोजन को स्थगित करने का ऐलान किया है और आरोप लगाया है कि इस जम्बूरी को लेकर गंभीर वित्तीय अनियमितताएँ और नियमों का उल्लंघन हुआ है।
बालोद जिले में 9 जनवरी से होने वाले राष्ट्रीय रोवर-रेंजर जम्बूरी को लेकर विवाद तब शुरू हुआ जब आयोजन का स्थल और वित्तीय प्रावधान विवादों में फंस गया। बृजमोहन अग्रवाल ने प्रेस नोट जारी कर कहा कि इस आयोजन के संबंध में स्काउट्स एंड गाइड्स के संविधान, नियमावली और प्रक्रियाओं का उल्लंघन हुआ है, जिसके चलते उन्होंने जम्बूरी को स्थगित करने का निर्णय लिया है।
उन्होंने बताया कि राज्य स्कूल शिक्षा विभाग ने बिना परिषद की अनुमति स्थान का निर्णय लिया और आयोजन को पहले निर्धारित नया रायपुर से बदलकर बालोद कर दिया, जो संस्था के स्वायत्त ढांचे के विपरीत है। यही नहीं, सरकार द्वारा बजट में स्वीकृत 10 करोड़ रुपये की राशि को स्काउट्स एंड गाइड्स के खाते में स्थानांतरित न करके जिला शिक्षा अधिकारी के खाते में भेज दिया गया, जिसे वित्तीय अनियमितता बताया जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार, बैठक में यह भी तथ्य सामने आया कि बिना खुले टेंडर और प्रक्रिया के निर्माण कार्य जम्बूरी स्थल पर पूरा कर दिया गया, जो नियमों के खिलाफ माना गया है। बैठक में उपस्थित पदाधिकारियों ने इस पर आपत्ति जताई और कहा कि ऐसे फैसले संस्था की स्वायत्तता एवं विश्वास को कमजोर करते हैं।
बृजमोहन अग्रवाल ने स्पष्ट किया कि वे अब भी भारत स्काउट्स एंड गाइड्स, छत्तीसगढ़ राज्य परिषद के वैधानिक अध्यक्ष हैं और उन्होंने अपने पद से इस्तीफा नहीं दिया है। उन्होंने कहा कि यदि इसके बावजूद जम्बूरी का आयोजन किया जाता है, तो उसकी सभी प्रशासनिक, वित्तीय और नैतिक जिम्मेदारी राज्य स्कूल शिक्षा विभाग की होगी।
दूसरी ओर, राज्य स्कूल शिक्षा विभाग के अधिकारी इस आरोप को खारिज करते हुए कहा है कि जम्बूरी आयोजन स्थगित नहीं किया गया है और उन्होंने आयोजन को लेकर कोई विघ्न या रोक नहीं लगाई है। विभाग का कहना है कि आयोजन समय पर और नियमानुसार होना चाहिए।
यह विवाद छत्तीसगढ़ की राजनीति में एक नया मोड़ ले रहा है क्योंकि यह केवल एक शैक्षणिक-सामाजिक कार्यक्रम का प्रश्न नहीं रह गया, बल्कि वित्तीय पारदर्शिता, प्रशासनिक प्रक्रिया और संस्थागत स्वायत्तता के व्यापक मुद्दे में बदल गया है।
विशेषज्ञों का कहना है कि स्काउट्स एंड गाइड्स जैसे राष्ट्रीय-स्तरीय कार्यक्रमों में पारदर्शिता और नियमों का पालन अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि यह न सिर्फ युवा प्रतिभाओं के विकास से जुड़ा है, बल्कि समाज में सार्वजनिक विश्वास को भी प्रभावित करता है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मुद्दा जल्द ही छत्तीसगढ़ की शिक्षा और समाज सेवा नीतियों पर एक व्यापक बहस का कारण बन सकता है। साथ ही, यह विवाद यह संकेत दे रहा है कि सरकारी विभागों और स्वायत्त संस्थाओं के बीच संबंध और कार्यक्रम संचालन की प्रकिया पर पुनः विचार होना चाहिए।
बृजमोहन अग्रवाल का राजनीतिक अनुभव और छत्तीसगढ़ में उनका प्रभाव किसी से छुपा नहीं है; वे कई बार विधायक रहे हैं और वर्तमान में सांसद हैं, जिनकी केंद्रीय और राज्य-स्तरीय भूमिका ने उनके व्यक्तित्व को और भी ऊँचा किया है।
वहीं, स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव भी विभाग की ओर से इस कार्यक्रम को लेकर भागपालट में आए बयान और स्थिति स्पष्ट करने में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। उनके दृष्टिकोण से यह विवाद एक सुगठित आयोजन के महत्व और विभागीय प्रक्रिया की आवश्यकता पर प्रकाश डालता है।
जम्बूरी आयोजन के स्थगन के निर्णय के बाद अब यह प्रतीक्षा की जा रही है कि आगे सरकार, विभाग और स्काउट्स एंड गाइड्स परिषद के बीच समन्वय और समाधान कैसे सामने आता है। यह मामला निश्चित ही शैक्षणिक-सामाजिक कार्यक्रमों के संचालन में प्रशासनिक दक्षता और जवाबदेही पर बड़ा सबक साबित हो सकता है।
अंततः, यह विवाद यह याद दिलाता है कि जब भी युवा-केंद्रित कार्यक्रमों में वित्तीय और प्रशासनिक मुद्दे शामिल होते हैं, तो उन्हें समय रहते पारदर्शिता, नियमों का पालन और जवाबदेही के साथ संभालना चाहिए ताकि समाज और युवा वर्ग का भरोसा बना रहे।

