बिलासपुर में अभिभूत कर देने वाली दुर्घटना उस समय सामने आई जब एक आवारा कुत्ता सरकारी स्कूल के परिसर में घुस गया और अचानक पढ़ाई कर रहे बच्चों पर हमला कर दिया। यह घटना सकरी माध्यमिक विद्यालय में हुई, जहाँ स्कूल का सामान्य सत्र चल रहा था।
घटना के अनुसार, कक्षा के दौरान एक आवारा कुत्ता अचानक स्कूल के खेल मैदान में प्रवेश कर गया और बिना किसी उकसावे के बच्चों पर झपट पड़ा। कुत्ते के हमले से विद्यालय परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।कुत्ते ने सबसे पहले कक्षा आठवीं की छात्रा मोना यादव पर हमला किया और उसके पैर को काट लिया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गई। बच्ची के चीखने की आवाज से अन्य छात्र भी दहशत में आ गए।
इसके बाद कुत्ते ने तमन्ना साहू और सूरज नामक दो अन्य बच्चों को भी निशाना बनाया। एक-एक कर बच्चों पर हुए हमले से स्कूल में भय का माहौल बन गया और बच्चे इधर-उधर भागने लगे।इसी दौरान एक अन्य बच्चा, जो अपने मामा के घर से स्कूल आया था, वह भी कुत्ते के काटने का शिकार हो गया। इस तरह कुल चार बच्चे इस हमले में घायल हुए।
अचानक हुए इस हमले से स्कूल का शैक्षणिक वातावरण पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया। बच्चों में डर इतना बढ़ गया कि कुछ छात्र सदमे की स्थिति में आ गए, वहीं शिक्षक भी हालात संभालने में जुट गए।शिक्षकों ने साहस दिखाते हुए बच्चों को कुत्ते से बचाने का प्रयास किया और किसी तरह उसे स्कूल परिसर से बाहर खदेड़ा। इसके बाद घायलों को तुरंत इलाज के लिए भेजा गया।
तीन घायल बच्चों को सिम्स अस्पताल में भर्ती कराया गया, जबकि एक बच्चे का इलाज निजी अस्पताल में चल रहा है। डॉक्टरों के अनुसार सभी बच्चों की हालत फिलहाल स्थिर बताई जा रही है।यह कोई पहली घटना नहीं है। इससे पहले भी बिलासपुर के अन्य स्कूलों में आवारा कुत्तों के हमले की घटनाएँ सामने आ चुकी हैं, जिनमें शिक्षक तक घायल हो चुके हैं।
जिले में बढ़ती आवारा कुत्तों की संख्या अब एक गंभीर समस्या बन चुकी है। स्कूल जैसे सुरक्षित माने जाने वाले स्थानों में इस तरह की घटनाएँ प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करती हैं।शिक्षा विभाग द्वारा स्कूल परिसरों की सुरक्षा को लेकर दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं, लेकिन ज़मीनी स्तर पर उनके प्रभावी क्रियान्वयन की कमी साफ दिखाई देती है।
यह घटना प्रशासन और नगर निगम के लिए चेतावनी है कि बच्चों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जा सकता। अब आवश्यकता है ठोस कदम उठाने की, ताकि स्कूलों को भयमुक्त और सुरक्षित बनाया जा सके और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

