कोंडागांव जिले में स्थित एक मक्का प्रसंस्करण प्लांट पर ग्रामीणों के उग्र विरोध ने पूरे क्षेत्र में तनाव का माहौल पैदा कर दिया है। कोकोड़ी गांव के पास संचालित एक निजी मक्का प्लांट पर सैकड़ों ग्रामीणों ने धावा बोलते हुए जमकर तोड़फोड़ की। इस घटना में लाखों रुपये के नुकसान का अनुमान लगाया जा रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि प्लांट से निकलने वाला प्रदूषित पानी और अपशिष्ट उनके खेतों तक पहुंच रहा है, जिससे फसलें बर्बाद हो रही हैं और जमीन की उर्वरता प्रभावित हो रही है।
बताया जा रहा है कि यह आक्रोश अचानक नहीं फूटा, बल्कि लंबे समय से simmer कर रही नाराज़गी का परिणाम था। ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने कई बार प्रशासन और संबंधित विभागों को लिखित व मौखिक शिकायतें दी थीं, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। आरोप है कि प्लांट से निकलने वाला गंदा पानी खुले नालों के माध्यम से बहते हुए कृषि भूमि तक पहुंच रहा है। इससे धान और अन्य फसलों की पैदावार पर बुरा असर पड़ा है। कुछ किसानों ने यह भी दावा किया कि पानी में दुर्गंध रहती है और पशुओं के स्वास्थ्य पर भी इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।
घटना वाले दिन बड़ी संख्या में ग्रामीण प्लांट परिसर के बाहर एकत्र हुए। पहले उन्होंने शांतिपूर्ण विरोध जताया, लेकिन बाद में स्थिति तनावपूर्ण हो गई। आक्रोशित भीड़ ने प्लांट के भीतर घुसकर खड़ी गाड़ियों, मशीनरी और अन्य सामान में तोड़फोड़ कर दी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कुछ वाहनों के शीशे तोड़ दिए गए और कार्यालय परिसर में भी नुकसान पहुंचाया गया। अनुमान है कि इस तोड़फोड़ से 10 से 20 लाख रुपये तक की क्षति हुई है, हालांकि आधिकारिक आंकड़ा अभी सामने नहीं आया है।
स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि कुछ कर्मचारियों को अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर छिपना पड़ा। एक वाहन चालक के बारे में बताया गया कि वह डर के कारण रातभर पास के जंगल क्षेत्र में छिपा रहा। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे और हालात को नियंत्रित करने की कोशिश की। देर रात तक समझाइश और बातचीत का दौर चलता रहा।
ग्रामीणों की मुख्य मांग है कि प्लांट से होने वाले कथित प्रदूषण की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यदि नियमों का उल्लंघन पाया जाए तो सख्त कार्रवाई की जाए। उनका कहना है कि विकास और उद्योग का वे विरोध नहीं करते, लेकिन उनकी आजीविका और पर्यावरण की कीमत पर कोई भी परियोजना स्वीकार्य नहीं है। किसानों का तर्क है कि यदि खेत ही बर्बाद हो जाएंगे तो उनका परिवार कैसे चलेगा। उन्होंने मुआवजे और स्थायी समाधान की मांग भी उठाई है।
दूसरी ओर, प्लांट प्रबंधन की ओर से आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। सूत्रों के अनुसार, प्रबंधन का कहना है कि वे सभी पर्यावरणीय मानकों का पालन कर रहे हैं और यदि कहीं कोई तकनीकी समस्या है तो उसे दूर किया जाएगा। प्रशासन ने भी मामले की जांच के आदेश दिए हैं। संबंधित विभागों को पानी और मिट्टी के नमूने लेकर परीक्षण करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि सच्चाई सामने आ सके।
यह घटना एक बार फिर औद्योगिक विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन की चुनौती को उजागर करती है। ग्रामीण इलाकों में स्थापित उद्योगों को स्थानीय समुदाय के साथ संवाद और पारदर्शिता बनाए रखना बेहद जरूरी है। यदि समय रहते शिकायतों पर ध्यान दिया जाए तो ऐसी उग्र स्थितियों से बचा जा सकता है। फिलहाल क्षेत्र में स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है, लेकिन ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो वे फिर से आंदोलन करने को बाध्य होंगे।
कोंडागांव में मक्का प्लांट पर बवाल! ग्रामीणों का उग्र प्रदर्शन

