रायपुर — देश की राजधानी दिल्ली में हाल ही में आयोजित कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेतृत्व स्तर की बैठक के बाद छत्तीसगढ़ कांग्रेस संगठन में बड़े स्तर पर कड़ी समीक्षा और जवाबदेही नीति लागू करने का निर्णय लिया गया है। इस बैठक में पार्टी के नवनियुक्त जिला कांग्रेस अध्यक्षों को लेकर कार्यशैली और प्रदर्शन की समीक्षा के लिए नए दिशानिर्देश तय किए गए हैं, जिनका मुख्य उद्देश्य संगठन को मजबूती देना और जमीनी स्तर पर निष्पादन को प्रभावी बनाना है।
इस महत्वपूर्ण बैठक के बाद प्रदेश कांग्रेस कमिटी (PCC) के अध्यक्ष दीपक बैज ने मीडिया से विस्तार से बात करते हुए कहा है कि अब पार्टी नेतृत्व नियमित अंतराल पर समीक्षा नीति अपनाएगा, जिससे कि जिला नेतृत्व में जवाबदेही और कुशलता दोनों बेहतर तरीके से सुनिश्चित की जा सके।
बैठक के प्रमुख निर्णय
दिल्ली में हुई उच्चस्तरीय बैठक के बाद कांग्रेस ने यह फैसला लिया है कि अब जिले स्तर पर काम कर रहे कांग्रेस अध्यक्षों की समीक्षा हर तीन महीने में की जाएगी। इसके तहत उनके परफॉर्मेंस (कार्य निष्पादन) को जांचा जाएगा और उन्हें तीन अलग-अलग कैटेगरी में बांटा जाएगा — ग्रीन, यलो और रेड। जो अध्यक्ष अपना काम संतोषजनक रूप से करेंगे, उन्हें ग्रीन श्रेणी में रखा जाएगा, जबकि कम या औसत कार्य प्रदर्शन करने वाले यलो में और कमजोर प्रदर्शन वाले रेड श्रेणी में रखे जाएंगे।
🔹 ग्रीन कैटेगरी:
– जिन जिला अध्यक्षों का प्रदर्शन संतोषजनक और प्रभावी रहेगा।
– उन्हें प्रोत्साहन और आगे की जिम्मेदारियाँ दी जा सकती हैं।
🔹 यलो कैटेगरी:
– औसत कार्य प्रदर्शन वाले अध्यक्ष।
– इनका प्रदर्शन सुधारने के लिए निगरानी जारी रहेगी।
🔹 रेड कैटेगरी:
– लगातार कमजोर प्रदर्शन दिखाने वाले जिला अध्यक्ष।
– ऐसे अध्यक्षों को सुधार का मौका देना होगा, अन्यथा पद परिवर्तन तक का फैसला लिया जा सकता है।
दूसरे शब्दों में कहा जाए तो अब कांग्रेस कमिटी अध्यक्षों के पद पर सिर्फ नाम नहीं बल्कि प्रदर्शन भी मायने रखेगा। यदि किसी अध्यक्ष का कामकाज तीन महीने की भी समयावधि में उम्मीद के अनुसार नहीं रहा, तो उसे पद से हटा कर अन्य सक्षम नेतृत्व को मौका देने का अधिकार पार्टी के पास रहेगा।
क्यों लाया गया यह फैसला?
पार्टी के अंदरूनी सूत्रों और वरिष्ठ नेता मानते हैं कि छत्तीसगढ़ कांग्रेस को पिछले कुछ वर्षों में राज्य में खोई जनसामान्य की धारणा और भूमिगत संगठनात्मक कमजोरी का सामना करना पड़ा है। स्थानीय नेताओं तथा कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने, जमीनी कार्य योजना को सुदृढ़ करने और स्थानीय मांगों का बेहतर समाधान देने के लिए यह कदम उठाया गया है।
इस दिशा में PCC अध्यक्ष दीपक बैज ने स्पष्ट कहा कि अब किसी भी पदाधिकारी को सिर्फ पद का दंभ नहीं, बल्कि प्रदर्शन की जिम्मेदारी निभानी होगी, वह चाहे जिला अध्यक्ष हो या कोई अन्य संगठनात्मक पदाधिकारी। यह बदलाव कांग्रेस को जमीनी राजनीति से जोड़ने और आगामी चुनावी महीनों में बेहतर प्रदर्शन सुनिश्चित करने की रणनीति का हिस्सा है।
केंद्र नेतृत्व की भी भागीदारी
दिल्ली में आयोजित बैठक में सिर्फ प्रदेश के वरिष्ठ नेता ही नहीं बल्कि कांग्रेस के राष्ट्रीय नेतृत्व के सदस्य भी मौजूद थे। इनमें से कई वरिष्ठ नेताओं ने यह स्पष्ट संकेत दिया कि आगे चलकर संगठन में जवाबदेही, प्रदर्शन आधारित निर्णय क्षमता और प्रशिक्षण कार्यक्रमों को ज्यादा ताकत दी जाएगी।
पूर्व लोकसभा नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने पार्टी के नवनियुक्त जिला अध्यक्षों को स्पष्ट रूप से संदेश दिया है कि “Perform or Make Way for Others” — यानी बेहतर प्रदर्शन करें, सड़क छोड़ दें उन्हें जिन्हें बेहतर नेतृत्व क्षमता दिखानी है। इस तरह से प्रदर्शन को प्राथमिकता देना कांग्रेस नेतृत्व की सोच का हिस्सा है।
कुछ रिपोर्टों के अनुसार राहुल गांधी दिल्ली में विशेष ट्रेनिंग प्रोग्राम भी आयोजित करेंगे जिसमें पार्टियों के जिला अध्यक्षों को नेतृत्व क्षमता, कार्य प्रबंधन और संगठन सुदृढ़ता पर दिशा निर्देश दिए जाएंगे। इससे यह भी संकेत मिलता है कि पार्टी सुदृढ़ संगठनात्मक कार्यशैली के लिए तैयारी कर रही है।
कांग्रेस संगठन की नीतिगत बदलाव की दिशा
छत्तीसगढ़ कांग्रेस की इस नई समीक्षा नीति से यह संदेश मिलता है कि पार्टी अब कमज़ोर नेतृत्व को नियमित तौर पर रिपोर्ट करने, उन्हें सुधार का मौका देने और आवश्यकता पड़ने पर संगठनात्मक बदलाव करने पर जोर दे रही है। यह नीति जिम्मेदारी, जवाबदेही और प्रदर्शन आधारित नेतृत्व की प्रवृत्ति को अधिक उभारने का प्रयास करती है।
विशेषकर आगामी राजनीतिक और निर्वाचन संबंधी माहौल में इसे काफी अहम समझा जा रहा है, क्योंकि पिछले स्थानीय चुनावों और पट्टी चुनावों में कांग्रेस संगठन को चुनौतीपूर्ण स्थिति का सामना करना पड़ा था। ऐसे में अच्छा तथा सक्रिय नेतृत्व बनाने की दिशा में यह नीति महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
किस प्रकार लागू होगी समीक्षा?
– हर जिले के कांग्रेस अध्यक्ष की कामकाज रिपोर्ट तीन महीने में सेंट्रल नेतृत्व को जाएगी।
– रिपोर्ट में कार्य की गुणवत्ता, पार्टी विस्तार, जनसमस्याओं पर प्रतिक्रिया और पार्टी की छवि को भी परखा जाएगा।
– समीक्षा के आधार पर ग्रेडेड सिस्टम के तहत उन्हें ग्रीन, यलो या रेड कैटेगरी में रखा जाएगा।
– रेड कैटेगरी में लगातार रहने वाले जिला अध्यक्ष को सुधार के लिए मौका दिया जाएगा, उसके बाद ही स्थानांतरण या बदलाव की प्रक्रिया शुरू होगी।
क्या बदलाव से कांग्रेस को फायदा मिलेगा?
विश्लेषकों का मानना है कि प्रदर्शन आधारित नेतृत्व नीति कांग्रेस को अधिक संगठित बनाने में मदद कर सकती है, विशेषकर जमीनी स्तर पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं को प्रेरित करने और स्थानीय समस्याओं के समाधान में तेजी लाने के लिए। हालांकि यह भी देखा जाना बाकी है कि तीन महीने की समय सीमा कितनी असरदार साबित होती है और क्या इससे चुनावों में बेहतर परिणाम हासिल किए जा सकते हैं या नहीं।
दिल्ली में हुई कांग्रेस उच्चस्तरीय बैठक के बाद अब छत्तीसगढ़ कांग्रेस ने सख्त प्रदर्शन समीक्षा नीति अपनाई है, जिसमें जिला अध्यक्षों की हर तीन महीने में मूल्यांकन प्रक्रिया शुरू होगी। कमजोर कामकाज वाले अध्यक्षों को सुधार के लिए समय देने के बाद भी नहीं सुधरने पर हटाया या बदला भी जा सकता है। यह निर्णय कांग्रेस के संगठनात्मक विस्तार और जवाबदेही नीति को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
छत्तीसगढ़ कांग्रेस में संगठनात्मक बदलाव: दिल्ली बैठक के बाद सख्ती,कमजोर जिलाध्यक्ष हटाए जाएंगे

