Posted in

डर से विकास तक: तुंगल बांध ने बदली सुकमा की पहचान

जगदलपुर छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित रहे इलाकों में अब बदलाव की तस्वीर साफ दिखाई देने लगी है। भय और हिंसा के लिए पहचाने जाने वाले क्षेत्र अब शांति, विकास और पर्यटन के नए प्रतीक बनते जा रहे हैं। इसी सकारात्मक परिवर्तन का सशक्त उदाहरण बनकर उभरा है सुकमा जिले का तुंगल बांध इको-टूरिज्म स्थल, जिसे वन विभाग द्वारा आधुनिक स्वरूप देकर विकसित और नवीनीकृत किया गया है।

प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर यह स्थल अब सिर्फ जलाशय तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पर्यटन, मनोरंजन, रोजगार और पर्यावरण संरक्षण का संगम बन चुका है। वन मंत्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन में वन विभाग ने योजनाबद्ध तरीके से इस इको-टूरिज्म स्थल को विकसित किया है, जिससे सुकमा जिले के लोगों को एक सुरक्षित, सुंदर और उपयोगी पर्यटन स्थल मिल सका है।

हरियाली, सुकून और सीख का संगम बना तुंगल इको-टूरिज्म स्थल

तुंगल बांध इको-टूरिज्म स्थल में हरे-भरे और सुव्यवस्थित लॉन विकसित किए गए हैं, जहां परिवारजन बच्चों और बुजुर्गों के साथ सुकून भरे पल बिता सकते हैं। पिकनिक के लिए यह स्थान तेजी से लोगों की पहली पसंद बनता जा रहा है।

वन विभाग द्वारा बच्चों के लिए आकर्षक और ज्ञानवर्धक साइन बोर्ड लगाए गए हैं, जिनमें स्थानीय वन्यजीवों, पक्षियों और जैव विविधता की सरल एवं रोचक जानकारी दी गई है। इस पहल का उद्देश्य बच्चों में प्रकृति संरक्षण के प्रति जागरूकता और संवेदनशीलता विकसित करना है।

पर्यटकों को मिलेगा बस्तर की मिट्टी का स्वाद, खुलेगा ‘तुंगल नेचर कैफे’

पर्यटकों की सुविधा और स्थानीय लोगों की आजीविका को बढ़ावा देने के उद्देश्य से जल्द ही यहां ‘तुंगल नेचर कैफे’ की शुरुआत की जा रही है। इस कैफे में बस्तर क्षेत्र के स्थानीय व्यंजन और पारंपरिक पेय पदार्थ उपलब्ध कराए जाएंगे।

इस पहल से जहां पर्यटकों को स्थानीय संस्कृति और स्वाद का अनुभव मिलेगा, वहीं स्थानीय लोगों को रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर भी प्राप्त होंगे।

शांत जलाशय में रोमांच की लहरें, बोटिंग और वाटर एक्टिविटी शुरू

नवीनीकरण के बाद तुंगल बांध में बोटिंग गतिविधियों की औपचारिक शुरुआत की गई है। पर्यटकों के लिए: कयाकिंग, बांस राफ्टिंग, पैडल बोट जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। शांत जलाशय और चारों ओर फैली हरियाली के बीच ये गतिविधियां न केवल रोमांच प्रदान करती हैं, बल्कि प्रकृति के बेहद करीब समय बिताने का अनूठा अवसर भी देती हैं।

नक्सल भय से विकास की ओर, बदलती सोच की मिसाल बना तुंगल

वन विभाग की इस पहल से आम नागरिकों की सोच में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। जो क्षेत्र कभी भय, असुरक्षा और हिंसा से जुड़ा माना जाता था, वही आज शांति, विकास और पर्यटन का संदेश दे रहा है। यह बदलाव न केवल पर्यटन के लिहाज से महत्वपूर्ण है, बल्कि सामाजिक और मानसिक परिवर्तन का भी संकेत है।

भविष्य की योजनाएं: स्टे फैसिलिटी और एडवेंचर स्पोर्ट्स

भविष्य में तुंगल बांध क्षेत्र में: रुकने की सुविधाएं (स्टे फैसिलिटी) एडवेंचर स्पोर्ट्स गतिविधियां विकसित करने की योजना है। इससे सुकमा जिले के नागरिकों को पर्यटन के लिए बाहर जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी और जिले के भीतर ही उच्च स्तरीय पर्यटन सुविधाएं उपलब्ध होंगी।

सुकमा की नई पहचान बना तुंगल बांध, विश्वास और विकास का प्रतीक

सुकमा के मंडलाधिकारी अक्षय भोसले ने बताया कि वन विभाग द्वारा विकसित तुंगल बांध इको-टूरिज्म स्थल अब सुकमा जिले की बदलती पहचान का प्रतीक बन चुका है।
उन्होंने कहा कि “जहां कभी भय था, वहां अब विश्वास है, और जहां हिंसा की पहचान थी, वहां अब विकास ने जगह ले ली है। यह पहल सुकमा को पर्यटन मानचित्र पर नई और सकारात्मक पहचान दिलाने में अहम भूमिका निभाएगी।”

Share :

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *