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पीएलजीए युग का अंत: 20 माओवादी कैडरों का हथियारों सहित ऐतिहासिक आत्मसमर्पण

हैदराबाद / जगदलपुर। तेलंगाना और बस्तर क्षेत्र में माओवादी आंदोलन को एक निर्णायक झटका देते हुए CPI (माओवादी) संगठन के पीएलजीए (People’s Liberation Guerrilla Army) से जुड़े 20 हार्डकोर माओवादी कैडरों ने हथियारों सहित आत्मसमर्पण कर दिया है। इस आत्मसमर्पण को सुरक्षा एजेंसियाँ पीएलजीए युग के अंत के रूप में देख रही हैं।

PLGA को बड़ा झटका: शीर्ष कमांडर भी शामिल

आत्मसमर्पण करने वालों में बडसे सुक्का @ देवा – DK SZCM और PLGA बटालियन कमांडर (₹75 लाख इनामी), कनकनाला राजी रेड्डी @ वेंकटेश – तेलंगाना राज्य समिति सदस्य जैसे वरिष्ठ माओवादी नेता शामिल हैं, जिससे संगठन की कमर टूटती दिख रही है।

बरामद हथियार और गोला-बारूद (पूरी सूची)

पुलिस को कुल 48 अत्याधुनिक हथियार और 2206 राउंड गोला-बारूद सौंपे गए: 2 LMG, 8 AK-47, 10 INSAS, 8 SLR, 1 Colt Rifle (USA), 1 Tavor Rifle (Israel), 4 BGL, 11 Single Shot Gun, 2 Grenade, 1 Air Gun और ₹20,30,000 नकद भी बरामद

अन्य आत्मसमर्पित कैडर

बाकी 18 कैडर विभिन्न पदों से थे: DVCM, ACM, PPCM और पार्टी सदस्य, जो वर्षों से तेलंगाना–बस्तर बेल्ट में सक्रिय थे।

माओवादी संगठन पर सीधा असर

  • तेलंगाना राज्य समिति में अब केवल 1 SCM (दमोदर) शेष, दक्षिण और पश्चिम बस्तर में PLGA नेटवर्क लगभग ध्वस्त और 2023 में 125 सक्रिय कैडर → अब सिर्फ 17 बचे

आत्मसमर्पण के प्रमुख कारण

  • नेतृत्व की विफल रणनीति और लॉजिस्टिक संकट, सुरक्षा बलों का निरंतर दबाव, विचारधारा से मोहभंग और आंतरिक कलह, बीमारी और पारिवारिक दूर

सरकार की पुनर्वास नीति और लाभ

तेलंगाना सरकार की सरेंडर पॉलिसी के तहत:

  • DVCM / CyPCM: ₹5 लाख, ACM / PPCM: ₹4 लाख, पार्टी सदस्य: ₹1 लाख और हथियारों पर अतिरिक्त इनाम (AK-47: ₹4 लाख, LMG: ₹5 लाख आदि) कुल ₹1,81,90,000 की राशि वितरित और तत्काल सहायता: ₹25,000 प्रति कैडर

सरकार और पुलिस का संदेश

मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी और DGP तेलंगाना ने स्पष्ट संदेश दिया:

“हथियार छोड़िए, मुख्यधारा में लौटिए, विकास और शांति का रास्ता चुनिए।”

आत्मसमर्पण के आंकड़े (2024–2026)

  • 2024: 47 कैडर, 36 हथियार
  • 2025: 509 कैडर, 60 हथियार
  • 2026: 20 कैडर, 48 हथियार

कुल: 576 कैडर, 144 हथियार

यह आत्मसमर्पण केवल एक घटना नहीं, बल्कि तेलंगाना और बस्तर में माओवादी आंदोलन के पतन का संकेत है। सुरक्षा बलों का दावा है कि अब यह संघर्ष अपने अंतिम चरण में है और क्षेत्र स्थायी शांति की ओर बढ़ रहा है।

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