दंतेवाड़ा। आय से अधिक संपत्ति के मामले में दक्षिण बस्तर दंतेवाड़ा के विशेष न्यायालय ने तत्कालीन जिला शिक्षा अधिकारी सुभाष गंजिर को दोषी ठहराते हुए 4 वर्ष के सश्रम कारावास और 10 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है। अर्थदंड का भुगतान नहीं करने पर उन्हें अतिरिक्त 6 माह का सश्रम कारावास भुगतना होगा। न्यायालय ने 31 अगस्त 2026 को अपना फैसला सुनाया।
मामला भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13(1)(ई) सहपठित धारा 13(2) से संबंधित है। अभियोजन के अनुसार सुभाष गंजिर के विरुद्ध आरोप था कि लोक सेवक के पद पर रहते हुए उन्होंने अपनी ज्ञात आय के स्रोतों से अधिक चल-अचल संपत्ति अर्जित की। मामले में 14 फरवरी 2017 को FIR दर्ज की गई थी और 21 जून 2018 को चालान पेश किया गया।
आय और खर्च के हिसाब में सामने आई बड़ी असमानता
न्यायालय के समक्ष अभियोजन ने वेतन, बैंक खातों, जमीन-जायदाद, बीमा, निवेश, कृषि आय सहित विभिन्न स्रोतों से प्राप्त आय और किए गए खर्च का विस्तृत हिसाब प्रस्तुत किया। न्यायालय के अंतिम आकलन के अनुसार अभियुक्त की संबंधित अवधि में कुल आय 85,42,400 रुपये और कुल खर्च 1,60,85,776 रुपये पाया गया। विभिन्न मदों को अलग करने के बाद 75,43,376 रुपये की अनुपातहीन संपत्ति पाई गई, जो आय की तुलना में 88.30 प्रतिशत अधिक थी।
न्यायालय ने अपने निर्णय में कहा कि मौखिक एवं दस्तावेजी साक्ष्यों से अभियोजन द्वारा लगाए गए आरोप के आवश्यक तत्व प्रमाणित हुए हैं। इसके आधार पर सुभाष गंजिर को दोषसिद्ध किया गया।
संपत्तियों को शासन के पक्ष में राजसात करने का आदेश
दोषसिद्धि के साथ न्यायालय ने अनुपातहीन संपत्ति से अर्जित बताई गई कई चल-अचल संपत्तियों को छत्तीसगढ़ शासन के पक्ष में राजसात करने का आदेश भी दिया है। आदेश में विभिन्न स्थानों की कृषि एवं आवासीय भूमि तथा अन्य संपत्तियों का उल्लेख है। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि राजसात संबंधी आदेश अपीलीय न्यायालय के आदेश के अधीन रहेगा।
वहीं, तलाशी के दौरान जब्त कुछ वस्तुओं और राशि के संबंध में भी न्यायालय ने अलग-अलग आदेश दिए हैं। 8 लाख रुपये की जब्त राशि वारिसों को वापस करने तथा 80 हजार रुपये को छत्तीसगढ़ शासन के पक्ष में राजसात करने का आदेश दिया गया है। इसी तरह कुछ स्वर्ण आभूषणों को उनकी प्रकृति के आधार पर संबंधित पक्षों को लौटाने का निर्देश दिया गया।
2017 में हुई थी तलाशी
मामले की जांच के दौरान एसीबी की टीम ने सुभाष गंजिर से संबंधित विभिन्न ठिकानों पर तलाशी कार्रवाई की थी। न्यायालय के रिकॉर्ड के अनुसार तलाशी के दौरान बड़ी मात्रा में चल-अचल संपत्ति से संबंधित दस्तावेज और अन्य सामान जब्त किए गए थे। अभियोजन ने मामले को साबित करने के लिए 51 गवाहों के बयान तथा बड़ी संख्या में दस्तावेज न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किए।
न्यायालय ने यह भी माना कि आरोपी के खिलाफ रिकॉर्ड में पूर्व दोषसिद्धि का उल्लेख नहीं है और इसे उसका पहला अपराध माना गया। इसके बावजूद मामले की परिस्थितियों और आय से अधिक संपत्ति अर्जित किए जाने को देखते हुए न्यायालय ने चार वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई।
आय से अधिक संपत्ति के मामले में तत्कालीन DEO सुभाष गंजिर दोषी, 4 साल की सश्रम कारावास की सजा

