जगदलपुर। शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) के तहत अध्ययनरत छात्र से कथित रूप से बस सुविधा लेने और वार्षिक ट्यूशन फीस जमा करने का दबाव बनाए जाने का मामला अब जिला कलेक्टर तक पहुंच गया है। जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) को शिकायत देने के बाद अब छात्र के अभिभावक ने कलेक्टर, बस्तर को भी आवेदन सौंपकर निष्पक्ष जांच और न्याय की मांग की है।
संतोषी वार्ड क्रमांक-27, जगदलपुर निवासी महेन्द्र नाग ने कलेक्टर को दिए आवेदन में बताया है कि उनका पुत्र एलेक्स नाग शहर के हम अकादमी, जगदलपुर में कक्षा सातवीं का छात्र है। छात्र का प्रवेश शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) की धारा 12(1)(सी) के तहत हुआ है।
विद्यालय पर दबाव बनाने का आरोप
आवेदन में आरोप लगाया गया है कि विद्यालय प्रबंधन लगातार बस सुविधा लेने और प्रतिवर्ष 35 हजार रुपये ट्यूशन फीस जमा करने का दबाव बना रहा है। अभिभावक का कहना है कि प्रबंधन ने स्पष्ट रूप से कहा है कि यदि बस सुविधा नहीं ली गई और फीस जमा नहीं की गई तो बच्चे को विद्यालय में नहीं रखा जाएगा तथा किसी अन्य स्कूल में प्रवेश लेने के लिए कहा जाएगा।
आर्थिक स्थिति कमजोर, न्याय की मांग
महेन्द्र नाग ने आवेदन में उल्लेख किया है कि उनकी आर्थिक स्थिति अत्यंत कमजोर है और वे इतनी बड़ी राशि वहन करने में सक्षम नहीं हैं। उनका कहना है कि आरटीई के तहत प्रवेशित छात्र से इस प्रकार का दबाव बनाना कानून की भावना के विपरीत है।
उन्होंने कलेक्टर से मामले की निष्पक्ष जांच कर विद्यालय प्रबंधन को नियमों का पालन कराने, छात्र की पढ़ाई बिना किसी बाधा के जारी रखने तथा उचित कार्रवाई करने की मांग की है।
पहले डीईओ को भी दी गई थी शिकायत
गौरतलब है कि इससे पहले इसी मामले की शिकायत जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) को भी दी गई थी। शिकायत के बाद डीईओ बलिराम बघेल ने बताया था कि मामले में निजी विद्यालय संचालक को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। साथ ही जिले के सभी निजी विद्यालयों को आरटीई का शत-प्रतिशत पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। नियमों के उल्लंघन पर मान्यता समाप्त करने की चेतावनी भी दी गई है।
अब यह मामला कलेक्टर कार्यालय तक पहुंचने के बाद प्रशासन की अगली कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। यदि जांच में शिकायत सही पाई जाती है, तो यह मामला आरटीई के तहत अध्ययनरत विद्यार्थियों के अधिकारों की सुरक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण उदाहरण बन सकता है।
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