बिलासपुर। अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) और नायब तहसीलदार के आदेश के बावजूद किसान का नाम राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज नहीं करने के मामले में छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। हाई कोर्ट ने हल्का पटवारी नंबर 3, तहसील पथरिया को सात दिनों के भीतर नामांतरण आदेश का पालन करते हुए किसान का नाम राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज करने का निर्देश दिया है।
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि निर्धारित समय में आदेश का पालन नहीं किया गया और अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं की गई, तो संबंधित पटवारी के खिलाफ निलंबन, विभागीय जांच और अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है।
मामला मुंगेली जिले के ग्राम दाड़गांव निवासी पवन कुमार भास्कर से जुड़ा है। याचिकाकर्ता ने हाई कोर्ट में दायर याचिका में बताया कि खसरा नंबर 239/1 की 0.876 हेक्टेयर और खसरा नंबर 355/1 की 0.071 हेक्टेयर भूमि के नामांतरण का मामला राजस्व न्यायालय के समक्ष चल रहा था।
इस मामले में अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व), पथरिया ने 18 नवंबर 2024 को याचिकाकर्ता के पक्ष में नामांतरण का आदेश पारित किया था। इसके बाद नायब तहसीलदार, पथरिया ने 30 मई 2025 को संबंधित पटवारी को राजस्व रिकॉर्ड में आवश्यक सुधार कर किसान का नाम दर्ज करने का आदेश दिया।
आदेश के पालन के लिए 10 जून 2025 को नायब तहसीलदार कार्यालय की ओर से हल्का पटवारी नंबर 3 को ज्ञापन भी जारी किया गया था। इसके बावजूद लंबे समय तक नामांतरण की कार्रवाई पूरी नहीं हुई और किसान का नाम राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज नहीं किया गया।
आदेश के बाद भी नहीं हुआ नामांतरण
याचिकाकर्ता का कहना था कि राजस्व अधिकारियों के स्पष्ट आदेश होने के बावजूद पटवारी द्वारा नामांतरण की कार्रवाई पूरी नहीं की गई। काफी समय बीत जाने के बाद भी रिकॉर्ड में नाम दर्ज नहीं होने के कारण उसे हाई कोर्ट की शरण लेनी पड़ी याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अमन कुमार केशरवानी ने हाई कोर्ट में पक्ष रखा।
हाई कोर्ट ने 7 दिन में कार्रवाई के दिए निर्देश
मामले की सुनवाई जस्टिस ए.के. प्रसाद की सिंगल बेंच में हुई। कोर्ट ने राजस्व अधिकारियों के आदेश के बावजूद कार्रवाई लंबित रखे जाने पर नाराजगी जताई।
हाई कोर्ट ने संबंधित पटवारी को निर्देश दिया कि कोर्ट के आदेश की प्रति प्राप्त होने के सात दिनों के भीतर 30 मई 2025 के नामांतरण आदेश और 10 जून 2025 के ज्ञापन का पालन करते हुए किसान का नाम राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज किया जाए।
इसके साथ ही मुंगेली कलेक्टर को मामले की निगरानी करने और अधीनस्थ राजस्व अधिकारियों से आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित कराने का निर्देश दिया गया है।
10 दिन में देनी होगी अनुपालन रिपोर्ट
हाई कोर्ट ने संबंधित पटवारी को आदेश के पालन की रिपोर्ट 10 दिनों के भीतर रजिस्ट्रार (न्यायिक) के समक्ष प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।
कोर्ट ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि निर्धारित समय में नामांतरण आदेश का पालन नहीं किया गया या अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं की गई, तो संबंधित पटवारी के खिलाफ निलंबन, विभागीय जांच और अन्य अनुशासनात्मक कार्रवाई के आदेश दिए जा सकते हैं।
आदेश के बावजूद किसान का नाम राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज नहीं किया, हाई कोर्ट ने पटवारी को 7 दिन का समय दिया

