जगदलपुर। छत्तीसगढ़ पुलिस के बहादुर, बेबाक और कर्तव्यनिष्ठ पुलिस निरीक्षक अमित शुक्ला आखिरकार जिंदगी की जंग हार गए। 44 वर्ष की उम्र में ब्रेन कैंसर से जूझते हुए उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर सामने आते ही पुलिस विभाग, बस्तर अंचल और रायगढ़ में शोक की लहर दौड़ गई। सोमवार को उनके गृहग्राम में पूरे सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई।
अमित शुक्ला को पुलिस महकमे में लोग प्यार से “सुपर क्रॉप” कहकर बुलाते थे। यह नाम उन्हें उनकी तेज कार्यशैली, अनुशासन, साहस और मिलनसार व्यक्तित्व की वजह से मिला था। वे उन चुनिंदा पुलिस अफसरों में शामिल थे, जिन्होंने नक्सल प्रभावित इलाकों में जमीन पर उतरकर काम किया और कई बड़े ऑपरेशनों को लीड किया।
बताया जा रहा है कि जगदलपुर से तबादले के बाद उन्हें सिर में लगातार दर्द और परेशानी होने लगी थी। शुरुआती जांच के बाद उन्हें इलाज के लिए कोकिलाबेन हॉस्पिटल मुंबई ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने ब्रेन कैंसर की पुष्टि की। लंबे समय तक इलाज चला, लेकिन आखिरकार जिंदगी की यह लड़ाई वे हार गए। अपने पीछे वे दो बेटियों और पूरे परिवार को छोड़ गए हैं।
बस्तर में पदस्थापना के दौरान अमित शुक्ला ने दरभा, बकावंड और कोतवाली जैसे संवेदनशील इलाकों में सेवाएं दीं। वर्ष 2010 में दरभा क्षेत्र में नक्सल विरोधी अभियानों के दौरान उनकी भूमिका काफी अहम रही। जंगलों में सर्च ऑपरेशन और सुरक्षा अभियानों में वे हमेशा अपनी टीम के साथ सबसे आगे दिखाई देते थे।
सहकर्मियों के मुताबिक अमित शुक्ला सिर्फ एक पुलिस अधिकारी नहीं, बल्कि एक बेहतरीन इंसान भी थे। वे साफ दिल और बेबाक जुबान के लिए पहचाने जाते थे। गलत बात पर सीधे बोलना उनकी आदत थी, लेकिन उनके व्यवहार में कभी अहंकार नहीं दिखा। यही वजह रही कि मातहत जवानों से लेकर वरिष्ठ अधिकारी तक उनका सम्मान करते थे।
बहुत कम लोग जानते हैं कि पुलिस सेवा में आने से पहले अमित शुक्ला ने एमबीए की पढ़ाई की थी। बेहतर करियर विकल्प होने के बावजूद उन्होंने खाकी को चुना और रायपुर की चंदखुरी पुलिस अकादमी से ट्रेनिंग लेकर सेवा में आए। उनके भीतर पुलिसिंग को लेकर एक अलग ही जुनून था।
रायगढ़ जिले से उनका गहरा लगाव रहा। करीब 8 वर्षों तक उन्होंने रायगढ़ में सेवाएं दीं। दिलचस्प बात यह रही कि पुलिस करियर में उन्हें पहला थाना चक्रधर नगर मिला और अंतिम समय में भी वे वहीं पदस्थ थे। रायगढ़ की जनता और पुलिस विभाग के बीच उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई।
अमित शुक्ला के निधन को पुलिस विभाग ने अपूरणीय क्षति बताया है। सोशल मीडिया पर साथी पुलिसकर्मी, मित्र और शुभचिंतक लगातार श्रद्धांजलि दे रहे हैं। रायगढ़ पुलिस ने भी नम आंखों से अपने साथी अफसर को अंतिम सलाम किया।
उनकी कहानी सिर्फ एक पुलिस अफसर की नहीं, बल्कि उस जज्बे की कहानी है जिसने आखिरी सांस तक लड़ना नहीं छोड़ा। बस्तर की धरती शायद लंबे समय तक अपने “सुपर क्रॉप” को याद रखेगी।
बेबाकी, बहादुरी और ईमानदारी की पहचान थे अमित शुक्ला, नम आंखों से विदाई

