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बस्तर बनेगा राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति का केंद्र, अमित शाह की मौजूदगी में होगी हाईलेवल बैठक

जगदलपुर। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह 19 मई को बस्तर दौरे पर रहेंगे। नक्सलवाद के खिलाफ लगातार चलाए गए अभियानों में बड़ी सफलता और बदलते सुरक्षा हालात के बीच बस्तर पहली बार देश की सबसे महत्वपूर्ण सुरक्षा एवं प्रशासनिक बैठकों में से एक का गवाह बनने जा रहा है। जगदलपुर में आयोजित होने वाली मध्य क्षेत्रीय परिषद (Central Zonal Council) की बैठक को लेकर प्रशासनिक और सुरक्षा स्तर पर तैयारियां तेज कर दी गई हैं। यह बैठक इसलिए भी बेहद अहम मानी जा रही है क्योंकि लंबे समय तक नक्सल हिंसा की पहचान रहे बस्तर को अब केंद्र सरकार विकास, निवेश और सुशासन के नए मॉडल के रूप में प्रस्तुत करने की कोशिश कर रही है।

जानकारी के अनुसार इस उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता स्वयं अमित शाह करेंगे। बैठक में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी शामिल होंगे। इसके अलावा चारों राज्यों के मुख्य सचिव, डीजीपी, गृह विभाग के वरिष्ठ अधिकारी और सुरक्षा एजेंसियों के शीर्ष अधिकारी भी मौजूद रहेंगे। माना जा रहा है कि बैठक में अंतरराज्यीय सुरक्षा समन्वय, सीमावर्ती क्षेत्रों में कानून व्यवस्था, साइबर अपराध, नक्सल उन्मूलन, सड़क कनेक्टिविटी, स्वास्थ्य सेवाएं, शिक्षा और आदिवासी क्षेत्रों के विकास जैसे मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की जाएगी।

सूत्रों के मुताबिक केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह 18 मई की रात जगदलपुर पहुंच सकते हैं। उनके दौरे को देखते हुए सुरक्षा एजेंसियों ने पूरे शहर और आसपास के इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। एयरपोर्ट, सर्किट हाउस, बैठक स्थल और प्रमुख मार्गों पर विशेष निगरानी रखी जा रही है। प्रशासनिक अधिकारियों की लगातार बैठकें भी जारी हैं। बताया जा रहा है कि बस्तर में पहली बार इतने बड़े स्तर पर वीवीआईपी मूवमेंट होने जा रहा है, जिसके कारण पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बलों को विशेष अलर्ट पर रखा गया है।

राजनीतिक और रणनीतिक दृष्टि से भी यह बैठक काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। पिछले कुछ वर्षों में बस्तर में सुरक्षा बलों को नक्सल मोर्चे पर बड़ी सफलताएं मिली हैं और कई इलाकों में प्रशासन की पहुंच मजबूत हुई है। ऐसे समय में केंद्रीय गृह मंत्री का बस्तर में बैठक करना यह संकेत माना जा रहा है कि केंद्र सरकार अब बस्तर को “संघर्ष की भूमि” नहीं बल्कि “संभावनाओं और विकास की भूमि” के रूप में स्थापित करना चाहती है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस बैठक के जरिए केंद्र सरकार सुरक्षा के साथ-साथ विकास आधारित रणनीति को भी आगे बढ़ाने का संदेश दे सकती है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने भी इस बैठक को बस्तर के लिए ऐतिहासिक अवसर बताया है। उनका कहना है कि बस्तर में इस स्तर की बैठक आयोजित होना इस क्षेत्र में बढ़ते विश्वास, बेहतर होते हालात और विकास की नई दिशा का प्रतीक है। वहीं स्थानीय स्तर पर भी इस दौरे को लेकर उत्सुकता बनी हुई है और लोगों को उम्मीद है कि बैठक के बाद बस्तर के विकास और आधारभूत सुविधाओं को लेकर बड़े फैसले सामने आ सकते हैं।

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