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अमित शाह बोले…देश नक्सलमुक्त, अब 2029 से पहले हर केस सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचाना लक्ष्य

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने आज छत्तीसगढ़ के बस्तर में मध्य क्षेत्रीय परिषद की 26वीं बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सहित इन सदस्य राज्यों और केन्द्र सरकार के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। यह बैठक केन्द्रीय गृह मंत्रालय के अधीन कार्यरत अंतर-राज्य परिषद सचिवालय द्वारा छत्तीसगढ़ सरकार की मेज़बानी में आयोजित की गई।

बैठक को संबोधित करते हुए केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा कि यह बहुत हर्ष का विषय है कि यह बैठक बस्तर में आयोजित की जा रही है और इससे पहले ही आज पूरा बस्तर नक्सल मुक्त हो गया है। उन्होंने कहा कि आज भारत के नक्सल मुक्त होने का संपूर्ण श्रेय हमारे सुरक्षाबलों के जवानों के परिश्रम और बहादुरी को जाता है। हमारी एजेंसियों ने बहुत सटीकता के साथ इनपुट एकत्र किए, सभी राज्यों के पुलिसबलों और केन्द्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPFs) के साथ मिलकर हर इनपुट पर सटीक कार्रवाई करने से संबंधित समयबद्ध निर्णय किए। इसके साथ ही Whole of the Government Approach के साथ सभी राज्य सरकारों और केन्द्र सरकार के सभी विभागों ने नक्सलमुक्त हुए क्षेत्रों में विकास को पहुंचाने का काम किया।

अमित शाह ने कहा कि हमारी लड़ाई समाप्त नहीं हुई है क्योंकि नक्सल प्रभावित क्षेत्र लगभग पांच दशक से विकास की दौड़ में पिछड़े हुए हैं। उन्होंने कहा कि जब तक इन क्षेत्रों को विकास के मामले में देश के बाकी क्षेत्रों के समकक्ष नहीं ले आते, तब तक हमारी लड़ाई समाप्त नहीं होगी। केन्द्रीय गृह मंत्री ने पूरे देश के नक्सल मुक्त होने के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का हार्दिक अभिनंदन किया।

अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में क्षेत्रीय परिषद बैठकों का एक मजबूत और जीवंत तंत्र बना है। हमने इसे निर्णायक, निरंतर और परिणामदायी बनाया है। 2004 से 2014 के 10 वर्षों में क्षेत्रीय परिषद की मात्र 11 बैठकें हुई थीं, जो 2014 से 2026 के बीच बढ़कर 32 हो गई हैं। पहले 10 वर्षों में स्टैंडिंग कमेटी की 14 बैठकें हुई थीं, जो इस अवधि में ढाई गुना बढ़कर 35 हुई हैं। उन्होंने कहा कि 2004 से 2014 में मात्र 569 मुद्दों पर चर्चा हुई थी, जबकि 2014 से 2026 में 1729 मुद्दों पर चर्चा हुई है, और उनमें से लगभग 80% मुद्दों का सफल निराकरण भी कर लिया गया है। लंबित मुद्दों में से अधिकांश मॉनिटरिंग से संबंधित हैं, जिनमें किसी भी प्रकार का विवाद शेष नहीं है।

केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि जल जीवन मिशन-2 पर हमें अभी से फोकस करना चाहिए और हर घर में नल से जल पहुंचाने की व्यवस्था करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य, पोषण और समाज कल्याण बहुत संवेदनशील मुद्दे हैं। गृह मंत्री ने सभी मुख्यमंत्रियों और मुख्य सचिवों से आह्वान किया कि कुपोषण के खिलाफ भारत सरकार की लड़ाई में कंधे से कंधा मिलाकर आगे बढ़ें। शिक्षा के क्षेत्र में स्कूल ड्रॉपआउट दर और स्कूलों की गुणवत्ता सुधारने के लिए भी और अधिक कार्य हों। वित्तीय समावेशन और बिजली सुधार इस विकसित क्षेत्र को पूर्ण विकसित बनाने में बहुत बड़ा योगदान दे सकते हैं।

अमित शाह ने कहा कि शहरी नियोजन, जन स्वास्थ्य, वित्तीय समावेशन और बिजली सुधार के चारों क्षेत्रों में और अधिक गति से कार्य करें। गृह मंत्री ने अपील की कि हमारा कम से कम 50% ध्यान ग्रामीण विकास और व्यक्ति को मजबूत बनाने वाली योजनाओं पर रहना चाहिए।

उन्होंने कहा कि हर 5 किलोमीटर के दायरे में बैंक की सुविधा उपलब्ध होना बड़ी उपलब्धि है, क्योंकि हमारी सभी योजनाएं Direct Benefit Transfer (DBT) आधारित हैं। इसीलिए सभी राज्यों को इस दिशा में ठोस प्रयास करने की आवश्यकता है।

केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि POCSO और बलात्कार के मामलों में अगर समय से DNA जांच हो जाए तो इनमें दोषसिद्धि की दर शत-प्रतिशत हो सकती है। उन्होंने कहा कि अदालतों में लंबित पड़े पाँच साल से अधिक पुराने मामलों के तेजी से निपटारे के लिए उच्च न्यायालयों को विशेष अदालतें गठित करनी चाहिए। गंभीर अपराधों में शासन को ऐसी गंभीरता दिखानी चाहिए। उन्होंने चारों राज्यों के मुख्यमंत्रियों से आग्रह किया कि वे 1930 हेल्पलाइन पर केन्द्रीय गृह मंत्रालय के प्रारूप के अनुरूप ही राज्यों का प्रारूप लागू करें और राज्यों की हेल्पलाइन के कॉल सेंटर को अपडेट करें।

अमित शाह ने कहा कि मिलावटखोरी के मामलों में जो केस रजिस्टर्ड होता है और पेनल्टी लगती है, उसकी सार्वजनिक जानकारी भी दी जानी चाहिए। इससे जनता को पता चलेगा कि दोषी दुकानों पर मिलावटी चीजें मिलती हैं।

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि आपराधिक न्याय प्रणाली की तीनों नवीन न्याय संहिताओं पर बहुत अच्छा अमल हुआ है। उन्होंने कहा कि अब भी इसमें बहुत सारे मुद्दे ऐसे हैं जिनके क्रियान्वयन पर हमें बल देना होगा। गृह मंत्री ने कहा कि जिस तरह से हमने देश को नक्सलवाद से मुक्त किया है, उसी तरह 3 साल में हर आपराधिक मुकदमे को सुप्रीम कोर्ट तक अंजाम देने का लक्ष्य हमें 2029 से पहले पूरा करना है।

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