जगदलपुर। बस्तर जिले के नेतानार गांव में सोमवार को विकास और डिजिटल सुविधाओं की नई तस्वीर देखने को मिली। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने सीआरपीएफ कैंप पहुंचकर “शहीद वीर गुंडाधूर सेवा डेरा” (जन सुविधा केंद्र) का उद्घाटन किया। इस दौरान उन्होंने बस्तर की प्रसिद्ध इमली का स्वाद भी चखा और कहा कि यहां की इमली खट्टी नहीं बल्कि मिठास से भरी हुई है।
दौरे के दौरान केंद्रीय गृहमंत्री ने इमली प्रसंस्करण केंद्र में काम कर रही महिला स्व सहायता समूह की महिलाओं से बातचीत की। महिलाओं ने बताया कि इमली प्रसंस्करण और पल्प निर्माण के जरिए उनकी आय में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। समूह की सदस्य लंबी नाग ने बताया कि इस काम से महिलाएं सालाना करीब एक लाख रुपए तक की आय अर्जित कर सकेंगी।
गुंडाधूर महिला स्व सहायता समूह द्वारा तैयार की जा रही उच्च गुणवत्ता वाली इमली पल्प की भी जानकारी दी गई। महिलाओं के आत्मनिर्भर बनने की इस पहल को लेकर केंद्रीय गृहमंत्री ने उनकी सराहना की।
इसके बाद उन्होंने सेवा सेतु केंद्र का निरीक्षण किया, जहां ग्रामीणों को आधार कार्ड, केवाईसी, मोबाइल नंबर अपडेट, ई-आधार और विभिन्न ऑनलाइन सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। गांव की निवासी सुखदेवी ने बताया कि पहले आधार कार्ड बनवाने या अपडेट कराने के लिए 10 किलोमीटर पैदल चलकर नानगुर जाना पड़ता था, लेकिन अब गांव में ही सारी सुविधाएं मिलने लगी हैं।
सेवा केंद्र में महिलाओं को बैंक सखी का प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। इसके माध्यम से ग्रामीण महिलाएं गांव में ही बैंकिंग सेवाओं का लाभ ले सकेंगी। पैसा जमा करना, निकासी, खाता खोलना, केवाईसी और मोबाइल नंबर अपडेट जैसी सुविधाएं अब ग्रामीणों को आसानी से उपलब्ध होंगी।
नेतानार में अब जन्म, आय, जाति और अन्य प्रमाण पत्र भी एक ही छत के नीचे बनाए जा सकेंगे। ग्रामीणों ने इसे गांव के लिए बड़ी राहत बताया।
केंद्रीय गृहमंत्री ने सिलाई प्रशिक्षण केंद्र और धान डेकी प्रशिक्षण केंद्र का भी दौरा किया। यहां प्रशिक्षण ले रही महिलाओं ने बताया कि सिलाई और धान प्रसंस्करण से उन्हें रोजगार और आय का नया जरिया मिला है। ग्रामीण महिलाओं ने कहा कि इससे वे आत्मनिर्भर बन रही हैं और परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हो रही है।
दौरे के दौरान मुख्यमंत्री Vishnu Deo Sai, उपमुख्यमंत्री Vijay Sharma सहित कई जनप्रतिनिधि और अधिकारी मौजूद रहे।
अब गांव में ही आधार, बैंक और प्रमाण पत्र की सुविधा, नेतानार को मिली नई पहचान

