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नियम नहीं, दबाव चलेगा?’ कंगोली जमीन विवाद में राजस्व अमले पर दबाव के आरोप

जगदलपुर।धरमपुरा–कंगोली क्षेत्र इन दिनों जमीन में फेरबदल और फर्जीवाड़े का गढ़ बनता जा रहा है। खुलेआम नियम-कानून को ताक पर रखकर जमीन दलालों का खेल चरम पर है, और हैरानी की बात यह है कि यह सब कुछ प्रशासन की नाक के नीचे किया जा रहा है।

ग्राम कंगोली स्थित खसरा नंबर 18/7 की जमीन इस समय सबसे बड़ा विवाद का केंद्र बन चुकी है, जहां सरकारी शिक्षक निरंजन दास एवं अन्य द्वारा जबरन कब्जा करने का प्रयास सामने आया है।

जानकारी के अनुसार, इन कथित कब्जेदारों ने अपनी करतूतों पर पर्दा डालने के लिए कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक तक लिखित शिकायत दर्ज कराई थी, ताकि असली विवाद को उलझाया जा सके और सच्चाई दबाई जा सके। मामले की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर ने जांच प्रतिवेदन तहसीलदार से तलब किया था। इसके बाद जगदलपुर के राजस्व निरीक्षक शत्रुघ्न बघेल और तत्कालीन पटवारी बुधराम पोरते द्वारा जांच की गई।

               कंगोली मे बिना रस्ते की जमीन

जांच प्रतिवेदन में साफ-साफ उल्लेख किया गया कि खसरा नंबर 18/7 की भूमि पर सरकारी शिक्षक निरंजन दास एवं अन्य द्वारा जबरदस्ती कब्जा किया जा रहा है, और विवाद पूरी तरह अवैध है।

इसके बाद 18/7 कि भूमि को  MLB स्कूल के शिक्षक अविनाश दानी ने अपनी पत्नी सलीमा दानी के नाम पर रजिस्ट्री करवा ली।

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि खसरा 18/7 की जमीन के चारों ओर किसी प्रकार का रास्ता नहीं है, इसके बावजूद उसे आसपास की जमीन में मिलाकर अपना कब्जा बताया जा रहा है।

बताया जा रहा है कि धरमपुरा के कुख्यात लोगो के साथ मिलकर शिक्षक दानी और उसके सहयोगी इस जमीन को दूसरे की भूमि पर बैठाकर करोड़ों रुपये का खेल खेलने की फिराक में हैं।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि इस पूरे खेल में शिक्षक अविनाश दानी के द्वारा अन्य दलालों को मुख्य सूत्रधार बनाया है, जो लंबे समय से कंगोली–धरमपुरा क्षेत्र में जमीनों के रिकॉर्ड से छेड़छाड़ करता आ रहा है।

सूत्र बताते हैं कि दलाल द्वारा लगातार राजस्व निरीक्षक शत्रुघ्न बघेल पर दबाव बनाया गया ताकि फाइल आगे बढ़ाई जा सके, लेकिन आरआई ने स्पष्ट रूप से नियमों के खिलाफ काम करने से इनकार कर दिया।इसी तरह हल्का पटवारी ने भी भूमि को विवादित बताते हुए किसी भी प्रकार की कार्यवाही से हाथ खड़े कर दिए, जिससे पूरे फर्जीवाड़े की परतें खुलने लगीं।

अब जब पूरा मामला उजागर हो चुका है, तो दलाल और उसके संरक्षण में काम कर रहे लोगों में खलबली मची हुई है और साक्ष्य मिटाने की कोशिशें तेज़ हो गई हैं।

अब बड़ा सवाल यह है कि क्या जिला प्रशासन और पुलिस इस जमीन घोटाले पर ठोस कार्रवाई करेंगे या फिर जमीन दलालों के हौसले यूं ही बुलंद रहते रहेंगे। जनता जवाब मांग रही है, और जवाबदेही तय करना अब प्रशासन की मजबूरी बन चुकी है।

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