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CCTV में कुछ और, पुलिस की FIR में कुछ और? बोधघाट थाने की कार्रवाई पर उठे गंभीर सवाल

जगदलपुर। जमीन विवाद को लेकर मारपीट के एक मामले में थाना बोधघाट की कार्रवाई पर सवाल उठ रहे हैं। पीड़ित परिवार का आरोप है कि घटना से जुड़े सीसीटीवी फुटेज में पूरी स्थिति काफी हद तक साफ दिखाई दे रही है, इसके बावजूद पुलिस ने सभी पक्षों की भूमिका को ठीक से जांचे बिना कार्रवाई की।

परिवार का कहना है कि अगर पुलिस ने मामले में सीसीटीवी फुटेज को ठीक से देखा और शिकायत में लिखी बातों का फुटेज से मिलान किया होता, तो घटना में किसकी क्या भूमिका थी, यह स्पष्ट हो सकता था।

देखिए सीसीटीवी

खगेश ठाकुर घटना मे मौजूद नहीं, सीसीटीवी में बाइक से पहुंचने का दावा

परिवार के अनुसार 08 सितंबर की घटना के समय खगेश्वर ठाकुर मौके पर मौजूद नहीं था। उसका कहना है कि वह घटना होने के बाद अपनी बाइक से वहां पहुंचा था। परिवार का दावा है कि उन्होंने खुद सीसीटीवी फुटेज देखा है, जिसमें खगेश्वर ठाकुर के घटना के बाद बाइक से पहुंचने की बात दिखाई देती है।

परिवार का यह भी कहना है कि खगेश्वर ठाकुर की किसी के साथ हाथापाई नहीं हुई थी। इसके बावजूद बाद में उसके खिलाफ मामला दर्ज किए जाने को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

सवाल यह है कि यदि सीसीटीवी में खगेश्वर ठाकुर घटना के बाद बाइक से पहुंचता दिखाई दे रहा है, तो उसे आरोपी बनाने का आधार क्या था? क्या मामला दर्ज करने से पहले थाना बोधघाट पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज की जांच की थी?

घटना के दौरान भूमिका ठाकुर (अधिवक्ता) के साथ मारपीट का भी सीसीटीवी में होने का दावा

परिवार के अनुसार घटना के दौरान भूमिका ठाकुर के साथ भी मारपीट की गई। भूमिका ठाकुर अधिवक्ता हैं और बालकृष्ण ठाकुर की बेटी हैं। परिवार का दावा है कि सीसीटीवी फुटेज में अनूप ठाकुर द्वारा भूमिका ठाकुर के बाल खींचकर मुक्का मारने की घटना दिखाई दे रही है। ऐसे में परिवार का सवाल है कि जब घटना का फुटेज मौजूद है और उसमें मारपीट की स्थिति दिखाई दे रही है, तो पुलिस ने उस फुटेज के आधार पर क्या कार्रवाई की?

देखिए सीसीटीवी

08 सितंबर की सुबह शुरू हुआ विवाद

परिवार के अनुसार 08 सितंबर 2026 की सुबह करीब 6 बजे बालकृष्ण ठाकुर रोज की तरह घूमने के लिए निकले थे। इसी दौरान रास्ते में अनूप ठाकुर ने जमीन विवाद को लेकर उन्हें रोक लिया। परिवार का आरोप है कि अनूप ठाकुर ने उनके साथ गाली-गलौज की और मारपीट करने की धमकी दी। इसके बाद परिवार के लोग थाना बोधघाट पहुंचे और 08 सितंबर 2026 को लिखित शिकायत दी।

परिवार का कहना है कि थाना में शिकायत देने के बाद जब वे वापस अपने कार से घर लौटे, तभी अनूप ठाकुर, डूमर ठाकुर, अखिलेश चंदेल, राजेश्वरी चंदेल और चंद्रिका नाथ ठाकुर ने उनके साथ गाली-गलौज और मारपीट की। इसी दौरान भूमिका ठाकुर के साथ भी मारपीट किए जाने का परिवार का आरोप है। वहीं लवेश ठाकुर के हाथ में चोट आई और मेडिकल जांच में हाथ में फ्रैक्चर होने की बात सामने आई।

थाना में कार्रवाई नहीं हुई तो 09 सितंबर को एसपी बस्तर को दिया आवेदन

परिवार का कहना है कि 08 सितंबर को थाना बोधघाट में लिखित शिकायत देने के बाद जब तत्काल कार्रवाई नहीं हुई, तब 09 सितंबर 2026 को एसपी बस्तर को भी लिखित आवेदन दिया गया। परिवार के अनुसार एसपी बस्तर को दिए आवेदन में पूरी घटना की जानकारी दी गई और आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई तथा मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की गई थी।

परिवार का कहना है कि थाना स्तर पर कार्रवाई नहीं होने के कारण उन्हें वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के समक्ष आवेदन देना पड़ा। ऐसे में यह भी सवाल उठ रहा है कि जब पीड़ित परिवार ने घटना के संबंध में 08 सितंबर को ही थाना में शिकायत दे दी थी और अगले दिन 09 सितंबर को एसपी बस्तर को भी आवेदन दिया था, तो मामले में पुलिस की कार्रवाई किस आधार पर और कितनी गंभीरता से की गई?

शिकायत 8 सितंबर को, लेकिन पावती में 10 सितंबर की तारीख

मामले में एक और बात को लेकर परिवार ने सवाल उठाया है। परिवार का कहना है कि उन्होंने थाना बोधघाट में 08 सितंबर 2026 को लिखित शिकायत दी थी, लेकिन थाना से मिली पावती में 10 सितंबर 2026 की तारीख दर्ज है।

परिवार का सवाल है कि यदि शिकायत 08 सितंबर को दी गई थी, तो पावती पर 10 सितंबर की तारीख क्यों दर्ज की गई? शिकायत और पावती की तारीख में अंतर कैसे आया, यह भी जांच का विषय होना चाहिए।

थाना बोधघाट शिकायत

09 सितंबर को रिपोर्ट दर्ज, फिर 10 सितंबर की रात दूसरी कार्रवाई

परिवार के अनुसार लगातार शिकायत और प्रयास के बाद 09 सितंबर 2026 को करीब रात 8 बजे रिपोर्ट दर्ज की गई। इसके बाद 10 सितंबर को करीब दोपहर 2 बजे पुलिस मौके पर पहुंची और घटनास्थल का नक्शा एवं पंचनामा तैयार करने की कार्रवाई की।

परिवार का कहना है कि इसके बाद 10 सितंबर की रात करीब 10 बजे बालकृष्ण ठाकुर, लवेश ठाकुर और खगेश्वर ठाकुर के खिलाफ भी मामला दर्ज किया गया। यहीं से पुलिस की जांच को लेकर परिवार के सवाल और गंभीर हो जाते हैं। परिवार का कहना है कि खगेश्वर ठाकुर घटना के समय वहां मौजूद नहीं था और सीसीटीवी में उसके घटना के बाद बाइक से पहुंचने की स्थिति दिखाई देती है।

सीसीटीवी की जांच हुई या नहीं, सबसे बड़ा सवाल

पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल अब सीसीटीवी फुटेज को लेकर उठ रहा है। परिवार का कहना है कि घटना स्थल का सीसीटीवी फुटेज उपलब्ध है और उसमें अलग-अलग लोगों के आने-जाने तथा मारपीट की स्थिति दिखाई देती है।

ऐसे में सवाल है कि मामला दर्ज करने से पहले थाना बोधघाट पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज देखा था या नहीं? यदि पुलिस ने फुटेज देखा था, तो फिर घटना के समय मौके पर मौजूद नहीं रहने वाले खगेश्वर ठाकुर को किस आधार पर आरोपी बनाया गया? और यदि फुटेज की जांच नहीं की गई थी, तो इतने गंभीर मामले में पुलिस ने सीसीटीवी की जांच किए बिना ही कार्रवाई क्यों की? भूमिका ठाकुर के साथ मारपीट की घटना भी सीसीटीवी में दिखाई देने का परिवार दावा कर रहा है। ऐसे में यह भी सवाल है कि उस फुटेज के आधार पर पुलिस ने क्या कार्रवाई की?

परिवार ने निष्पक्ष जांच की मांग की

पीड़ित परिवार का कहना है कि मामले की जांच केवल शिकायत में लिखी बातों के आधार पर नहीं, बल्कि सीसीटीवी फुटेज, मेडिकल रिपोर्ट, 08 सितंबर को दी गई लिखित शिकायत, 09 सितंबर को एसपी बस्तर को दिए गए आवेदन और थाना बोधघाट की पावती को सामने रखकर की जानी चाहिए।

परिवार का कहना है कि सीसीटीवी में जो दिखाई दे रहा है, जांच उसी के आधार पर होनी चाहिए। यदि किसी व्यक्ति की घटना में भूमिका नहीं थी और वह घटना के बाद मौके पर पहुंचा था, तो उसके खिलाफ कार्रवाई का आधार भी स्पष्ट होना चाहिए।

इन सवालों के जवाब अब थाना बोधघाट की जांच और पुलिस अधिकारियों की कार्रवाई से ही सामने आएंगे। परिवार की मांग है कि पूरे मामले की जांच उपलब्ध सीसीटीवी फुटेज और मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर की जाए, ताकि घटना में शामिल और घटना के समय मौजूद लोगों की भूमिका स्पष्ट हो सके।

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