जगदलपुर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन और उनके सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूरे होने के मौके पर 17 सितंबर को जगदलपुर में बड़ा दीप प्रज्ज्वलन कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। मां दंतेश्वरी मंदिर परिसर और सिरहासार चौक के आसपास सवा लाख दीप जलाने की तैयारी है।
आयोजकों के अनुसार इस कार्यक्रम को प्रधानमंत्री के 25 वर्षों के सार्वजनिक जीवन के प्रति आभार और ‘सेवा संकल्प अभियान’ की शुरुआत से जोड़ा गया है। कार्यक्रम को लेकर तैयारियां भी पूरी की जा रही हैं। लेकिन कार्यक्रम से पहले शहर में इसके खर्च, आयोजन की जरूरत, यातायात व्यवस्था और छोटे कारोबारियों की रोजी-रोटी को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
सवा लाख दीपों पर कितना खर्च?
शहर में सबसे ज्यादा चर्चा इस बात को लेकर है कि एक लाख पचास हजार दीप जलाने में कुल कितना खर्च होगा। दीपक, तेल और दूसरी व्यवस्थाओं पर कितना पैसा खर्च किया जाएगा, इसकी पूरी जानकारी अभी सार्वजनिक नहीं हुई है।
लोगों का कहना है कि इतने बड़े आयोजन पर खर्च होने वाली राशि की जानकारी भी सामने आनी चाहिए, ताकि लोगों को पता चल सके कि आयोजन में कितना खर्च किया जा रहा है।
आयोजकों की ओर से इसे सिर्फ जन्मदिन का कार्यक्रम नहीं बताया जा रहा है। इसे ‘सेवा संकल्प अभियान’ की शुरुआत भी कहा जा रहा है। इसके तहत एक महीने तक सेवा, स्वास्थ्य, स्वच्छता और सामाजिक कार्यों से जुड़े कार्यक्रम किए जाने की बात कही गई है।
राम के नाम पर दीप जलाने की भी चर्चा
इस कार्यक्रम को लेकर शहर में एक और तरह की चर्चा है। कुछ लोगों का कहना है कि प्रधानमंत्री का जन्मदिन अपनी जगह है, लेकिन अगर इसी मौके पर भगवान राम के नाम पर एक दीप जलाने की अपील की जाती तो इसका संदेश अलग होता।
लोगों का कहना है कि दीप भारतीय संस्कृति और धार्मिक आस्था से जुड़ा हुआ है। इसलिए अगर इस आयोजन को किसी धार्मिक या सामाजिक संदेश से जोड़ा जाता तो लोगों के बीच इसकी अलग चर्चा होती।
हालांकि यह केवल स्थानीय लोगों के बीच चल रही चर्चा है। इसे आयोजकों का आधिकारिक बयान नहीं माना जा सकता।
कार्यक्रम के बीच ठेला कारोबारियों की चिंता
कार्यक्रम को लेकर सबसे बड़ा सवाल उन छोटे कारोबारियों को लेकर भी उठ रहा है, जो सड़क किनारे ठेला लगाकर अपना परिवार चलाते हैं।
17 सितंबर को गुरु नानक चौक से दंतेश्वरी चौक तक शाम 4 बजे से रात 11 बजे तक यातायात व्यवस्था में बदलाव किया गया है। ऐसे में इस मार्ग पर ठेला लगाने वाले और छोटे दुकानदारों को अपना कारोबार प्रभावित होने की चिंता है।
इन लोगों के लिए ठेला ही रोजी-रोटी का साधन है। अगर उन्हें कई घंटे तक ठेला हटाना पड़ा या कारोबार बंद करना पड़ा तो उनकी दिनभर की कमाई प्रभावित हो सकती है। इसी को लेकर शहर में सवाल उठ रहा है कि एक तरफ सवा लाख दीपों से शहर रोशन होगा, लेकिन जिन लोगों की रोज की कमाई इसी सड़क से होती है, उनके घर का चूल्हा कैसे जलेगा?
यह भी साफ नहीं है कि यातायात व्यवस्था से कितने ठेला कारोबारी प्रभावित होंगे और उनके लिए प्रशासन की ओर से कोई वैकल्पिक व्यवस्था की गई है या नहीं।
दीये की रोशनी के साथ रोजी-रोटी की चिंता
शहर में कुछ लोगों का कहना है कि किसी भी बड़े आयोजन की सफलता केवल उसकी भव्यता से नहीं देखी जानी चाहिए। यह भी देखना जरूरी है कि उससे आम लोगों को किसी तरह की परेशानी तो नहीं हो रही है।
एक तरफ सवा लाख दीप जलाने की तैयारी है, वहीं दूसरी तरफ छोटे दुकानदार और ठेला कारोबारी अपनी रोज की कमाई को लेकर चिंतित हैं। लोगों का सवाल है कि आयोजन की तैयारी के साथ-साथ इन छोटे कारोबारियों की परेशानी का भी ध्यान रखा गया है या नहीं।
भाजपा संगठन को लेकर भी चर्चा
दीप प्रज्ज्वलन कार्यक्रम के बीच स्थानीय भाजपा संगठन को लेकर भी तरह-तरह की चर्चाएं सामने आ रही हैं। पार्टी से जुड़े कुछ कार्यकर्ताओं के बीच यह चर्चा है कि जमीनी स्तर पर काम करने वाले छोटे कार्यकर्ताओं को अपेक्षित महत्व नहीं मिल रहा है। हालांकि इन बातों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है और यह सभी कार्यकर्ताओं की राय है, ऐसा भी नहीं कहा जा सकता।
इसी बीच संगठन के राष्ट्रीय महामंत्री बीएल संतोष के दो दिन पहले दिए गए उस बयान की भी चर्चा है, जिसमें कार्यकर्ताओं से थाना-चौकी के चक्कर नहीं लगाने की बात कही गई थी।
कुछ कार्यकर्ताओं का कहना है कि आम लोगों की समस्याओं के समाधान के लिए कई बार थाना और चौकी जाना जरूरी होता है। इसलिए इस बयान को लेकर कार्यकर्ताओं के बीच अलग-अलग राय होने की बात सामने आ रही है।
अब 17 सितंबर पर सबकी नजर
17 सितंबर का कार्यक्रम अब सिर्फ दीप जलाने तक सीमित नहीं रह गया है। शहर में कार्यक्रम की भव्यता के साथ इसके खर्च, यातायात व्यवस्था, छोटे कारोबारियों की रोजी-रोटी और संगठन से जुड़े सवालों पर भी चर्चा हो रही है।
आयोजकों का कहना है कि सवा लाख दीपों के जरिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 25 वर्षों के सार्वजनिक जीवन के प्रति आभार जताया जाएगा और ‘सेवा संकल्प अभियान’ की शुरुआत होगी।
लेकिन शहर में एक सवाल लगातार उठ रहा है…17 सितंबर की शाम दीयों की रोशनी तो दिखाई देगी, लेकिन क्या उस रोशनी में उन छोटे कारोबारियों की रोजी-रोटी भी दिखाई देगी, जिनका कारोबार आयोजन की व्यवस्था से प्रभावित हो सकता है?अब इसका जवाब 17 सितंबर के आयोजन और प्रशासन की व्यवस्था से ही सामने आएगा।
डेढ़ लाख दीयों की रोशनी, रोजी-रोटी और संगठन में चर्चा…. जगदलपुर में 17 सितंबर को क्या होगा?

