जगदलपुर। शहीद महेंद्र कर्मा स्मृति चिकित्सालय, डिमरापाल में कार्यरत नर्सिंग कर्मचारियों ने लंबे समय से लंबित ग्रेड-पे एवं वेतनमान की मांग को लेकर आंदोलन का रास्ता अख्तियार कर लिया है। नर्सिंग ग्रेड-पे की मांग को लेकर नर्सिंग ऑफिसर एसोसिएशन, मेकाज ने अस्पताल अधीक्षक को पत्र सौंपकर चरणबद्ध आंदोलन की जानकारी दी है। एसोसिएशन ने स्पष्ट किया है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द ठोस कार्रवाई नहीं की गई तो आंदोलन को आगे और व्यापक किया जाएगा।
14 वर्षों से लंबित है मांग
नर्सिंग कर्मचारियों का कहना है कि नर्सिंग ग्रेड-पे एवं वेतनमान से संबंधित मांग पिछले करीब 14 वर्षों से शासन और प्रशासन के समक्ष लगातार रखी जा रही है, लेकिन अब तक इसका स्थायी समाधान नहीं हो पाया है। कर्मचारियों के अनुसार, इस संबंध में संबंधित विभागीय स्तर पर प्रस्ताव तैयार किए जाने के बावजूद उस पर अंतिम निर्णय नहीं होने से नर्सिंग कर्मचारियों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।
एसोसिएशन का कहना है कि आयुक्त शिक्षा कार्यालय द्वारा ग्रेड-पे से संबंधित प्रस्ताव तैयार किया जा चुका है, लेकिन प्रस्ताव तैयार हुए करीब 9 माह का समय बीत जाने के बाद भी इसे लागू नहीं किया गया है। ऐसे में कर्मचारियों का कहना है कि लंबे समय से चली आ रही मांग अब केवल आश्वासन तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि शासन को इस पर निर्णय लेकर आदेश जारी करना चाहिए।
6 से 8 अक्टूबर तक काली पट्टी बांधकर विरोध
प्रदेश स्तर पर प्रस्तावित आंदोलन के क्रम में मेकाज के नर्सिंग कर्मचारी भी विरोध प्रदर्शन में शामिल होंगे। एसोसिएशन द्वारा जारी कार्यक्रम के अनुसार 6, 7 और 8 अक्टूबर 2026 को नर्सिंग कर्मचारी अपनी ड्यूटी के दौरान काली पट्टी बांधकर सांकेतिक विरोध दर्ज कराएंगे।
यह सांकेतिक विरोध प्रतिदिन सुबह 11 बजे से दोपहर 1 बजे तक किया जाएगा। कर्मचारियों का कहना है कि काली पट्टी बांधकर विरोध जताने का उद्देश्य शासन-प्रशासन का ध्यान लंबे समय से लंबित ग्रेड-पे एवं वेतनमान की मांग की ओर आकर्षित करना है।
मांग पूरी नहीं हुई तो 18 नवंबर से अनिश्चितकालीन आंदोलन
एसोसिएशन ने अपने पत्र में आगे की आंदोलनात्मक रणनीति की भी जानकारी दी है। पत्र के अनुसार, यदि शासन-प्रशासन द्वारा नर्सिंग कर्मचारियों की मांगों पर समय रहते सकारात्मक एवं ठोस निर्णय नहीं लिया गया तो 18 नवंबर 2026 से प्रदेश स्तरीय अनिश्चितकालीन आंदोलन शुरू किया जाएगा।
एसोसिएशन ने कहा है कि लगातार मांग उठाने और शासन स्तर पर प्रस्ताव तैयार होने के बावजूद यदि उसे लागू नहीं किया जाता है, तो कर्मचारियों के पास आंदोलन को और तेज करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा।
मरीजों की परेशानी की जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी
एसोसिएशन ने अपने पत्र में आंदोलन के दौरान मरीजों को होने वाली संभावित परेशानियों का भी उल्लेख किया है। संगठन ने स्पष्ट किया है कि यदि मांगों पर समय रहते कार्रवाई नहीं होती और आंदोलन अनिश्चितकालीन रूप लेता है, तो इस दौरान मरीजों को होने वाली परेशानियों की जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।
नर्सिंग कर्मचारियों का कहना है कि वे लंबे समय से अपनी मांगों को लोकतांत्रिक और विभागीय माध्यम से शासन के समक्ष रखते आ रहे हैं। इसके बावजूद मांग का निराकरण नहीं होने के कारण अब चरणबद्ध आंदोलन का निर्णय लिया गया है।
अस्पताल प्रबंधन को दी गई पूर्व सूचना
नर्सिंग ऑफिसर एसोसिएशन, मेकाज ने आंदोलन शुरू करने से पहले अस्पताल प्रबंधन को इसकी लिखित सूचना दे दी है। एसोसिएशन ने अधीक्षक से मांग की है कि नर्सिंग कर्मचारियों के हित से जुड़े ग्रेड-पे एवं वेतनमान संबंधी लंबित प्रस्ताव को जल्द लागू कराने की दिशा में आवश्यक कार्रवाई की जाए।
नर्सिंग कर्मचारियों के आंदोलन से अब शासन-प्रशासन पर इस लंबे समय से लंबित मांग के निराकरण को लेकर दबाव बढ़ने की संभावना है। फिलहाल 6 से 8 अक्टूबर तक काली पट्टी बांधकर सांकेतिक विरोध के जरिए कर्मचारी अपनी नाराजगी दर्ज कराएंगे। इसके बाद भी यदि मांगों पर निर्णय नहीं होता है तो 18 नवंबर से प्रदेशव्यापी अनिश्चितकालीन आंदोलन की चेतावनी दी गई है।
ग्रेड-पे की मांग को लेकर नर्सिंग कर्मचारियों का आंदोलन तेज

