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छत्तीसगढ़ का सबसे बड़ा शराब घोटाला!

ED का दावा— 2883 करोड़ की अवैध कमाई, सत्ता-सिस्टम-सिंडिकेट की पूरी चेन बेनकाब

रायपुर:छत्तीसगढ़ में शराब केवल नशा नहीं रही, बल्कि लूट का संगठित कारोबार बन चुकी थी। प्रवर्तन निदेशालय (ED) के ताजा खुलासे ने राज्य की राजनीति और प्रशासन को सीधे कठघरे में खड़ा कर दिया है। जांच एजेंसी का दावा है कि शराब नीति की आड़ में करीब 2883 करोड़ रुपये की अपराध-जनित आय (Proceeds of Crime) खड़ी की गई।

यह कोई छुटपुट भ्रष्टाचार नहीं, बल्कि पूरी सरकार के दौर में चला एक सिस्टमेटिक घोटाला बताया जा रहा है, जिसमें अफसर, नेता और शराब माफिया एक ही धागे में बंधे नजर आते हैं।

🔴 कैसे लूटा गया सरकारी खजाना?

ED की जांच के मुताबिक 2019 से 2023 के बीच छत्तीसगढ़ की आबकारी व्यवस्था को जानबूझकर इस तरह बदला गया कि

  • शराब ठेकेदारों से फिक्स कमीशन वसूला जाए,
  • बिना रिकॉर्ड के शराब बिके,
  • लाइसेंस और सप्लाई पर कार्टेल सिस्टम चले,
  • और हर बोतल से सरकार नहीं, बल्कि सिंडिकेट कमाए

यानी शराब दुकानों पर ग्राहक तो आम आदमी था, लेकिन मुनाफा सत्ता के करीबियों की जेब में जा रहा था।

🧑‍⚖️ कौन-कौन घेरे में?

ED की चार्जशीट और जांच दस्तावेजों में कई बड़े नाम सामने आए हैं—
➡️ वरिष्ठ IAS अधिकारी,
➡️ आबकारी विभाग के शीर्ष अफसर,
➡️ राजनीतिक रसूख वाले चेहरे,
➡️ और सत्ता के बेहद नजदीकी लोग।

ED का कहना है कि अब तक 81 लोगों को आरोपी बनाया गया, जिनमें दर्जनों नए नाम शामिल हैं। कई गिरफ्तार हो चुके हैं, कई पूछताछ के दायरे में हैं।

💰 2883 करोड़ का मतलब क्या है?

यह रकम सिर्फ कागजों की संख्या नहीं है।
यह वही पैसा है—

  • जिससे स्कूल बन सकते थे,
  • अस्पताल सुधर सकते थे,
  • सड़कें बन सकती थीं,
  • और गरीबों की योजनाएं चल सकती थीं।

लेकिन यह पैसा शराब के हर घूंट के साथ सिस्टम ने पी लिया

⚖️ अब आगे क्या?

मामला अब PMLA कोर्ट में है।
ED की जांच अभी खत्म नहीं हुई है और संकेत साफ हैं—
➡️ और नाम सामने आ सकते हैं,
➡️ और गिरफ्तारियां हो सकती हैं,
➡️ और राजनीतिक भूचाल आना तय है।

सबसे बड़ा सवाल

  • क्या यह घोटाला बिना राजनीतिक संरक्षण के संभव था?
  • क्या सिर्फ अफसर बलि का बकरा बनेंगे या असली चेहरे भी सामने आएंगे?
  • और क्या 2883 करोड़ की लूट के बाद भी कोई नैतिक जिम्मेदारी तय होगी?
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