जगदलपुर में इस समय गर्मी ऐसी पड़ रही है कि दोपहर में बाहर निकलना भी मुश्किल हो गया है। लोग छांव और पानी की तलाश में भटक रहे हैं, लेकिन शहर का स्विमिंग पूल खुद ही बंद पड़ा है। राहत देने वाली सुविधा ही आज बेकार पड़ी है।
जिस स्विमिंग पूल में बच्चों की हंसी और युवाओं की चहल-पहल गूंजनी चाहिए थी, वहां आज सन्नाटा पसरा है। सेटर बंद है और अंदर सिर्फ खालीपन दिखाई देता है। ये नजारा सीधे-सीधे नगर निगम जगदलपुर की लापरवाही की कहानी बयान करता है।
सबसे बड़ी बात ये है कि पूल इसलिए बंद है क्योंकि टेंडर में किसी ठेकेदार ने दिलचस्पी नहीं दिखाई। अब सवाल ये उठता है कि क्या जनता की सुविधा ठेकेदार के मूड पर चलेगी? अगर कोई आगे नहीं आया तो क्या काम ही बंद कर देंगे?
नगर निगम को गर्मी शुरू होने से पहले ही तैयारी करनी चाहिए थी, लेकिन बताया जा रहा है कि यहां तो अप्रैल में जाकर टेंडर निकाला गया। जब तक प्रक्रिया पूरी होती, तब तक आधी गर्मी निकल गई। अब लोग परेशान हो रहे हैं और अफसर फाइलों में उलझे हैं।
पूरा सिस्टम ऐसा लग रहा है जैसे सिर्फ कागजों में काम हो रहा हो। कभी मीटिंग, कभी फोटो, लेकिन जमीन पर कुछ नहीं। जनता को राहत देने की जगह बस दिखावा ज्यादा हो रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि जब ठेकेदार नहीं मिल रहा, तो नगर निगम खुद अपने स्टाफ से पूल क्यों नहीं चला सकता? आखिर ये कोई नामुमकिन काम तो है नहीं। बस करने की नीयत होनी चाहिए।
असल बात ये है कि तैरना कोई शौक भर नहीं, बल्कि जरूरी हुनर है। पानी से जुड़े हादसों में यही प्रतिभा जिंदगी बचा सकता है। फिर भी इसको लेकर इतनी लापरवाही समझ से परे है।
हाल ही में बरगी में जो घटना हुई, उसने ये साफ कर दिया कि तैरना न आना कितना खतरनाक हो सकता है। ऐसी घटनाएं बार-बार चेतावनी देती हैं, लेकिन सिस्टम है कि जागता ही नहीं।

हिंदुस्तान टाइम्स के पत्रकार रितेश मिश्रा ने अपने फेसबुक पोस्ट में लिखा है कि बरगी हादसे के बाद यह विषय और गंभीर हो गया है। उन्होंने लिखा…“मैं कछार का निवासी हूँ, गंगा किनारे पला-बढ़ा हूँ, लेकिन अफसोस है कि मुझे तैरना नहीं आता। मेरा मानना है कि हर कॉम्प्लेक्स, स्कूल और मोहल्ले में स्विमिंग पूल होना चाहिए, चाहे वह सरकारी हो या निजी। हर बच्चे को तैरना आना चाहिए। विदेशों में यह व्यवस्था आम है, जबकि भारत में अभी बहुत कम है। हर सरकार को स्कूलों में स्विमिंग पूल और तैराकी को अनिवार्य करना चाहिए। बरगी की घटना के बाद मध्य प्रदेश सहित सभी राज्यों को इस विषय को गंभीरता से लेना चाहिए। पीआर कम करें और हल निकालें।
वही शहर वासियों का कहना है कि उन्होंने नेताओं को इसलिए चुना है कि वे सुविधाएं दें, न कि बहाने बनाएं। स्विमिंग पूल जैसी बेसिक सुविधा भी अगर चालू नहीं हो पा रही, तो ये सीधी नाकामी है। अब जरूरत है कि नगर निगम नींद से जागे और तुरंत कोई हल निकाले। पीआर और फोटो खिंचवाने से काम नहीं चलेगा। जनता को राहत चाहिए और वो भी अभी चाहिए।

