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जगदलपुर में जल संकट गहराया: सभापति पर पक्षपात के आरोप, 10 दिनों से टैंकर खराब, जनता त्रस्त

जगदलपुर नगर निगम क्षेत्र में इन दिनों पेयजल संकट गंभीर रूप ले चुका है। शहर के कई वार्डों में पानी की आपूर्ति बाधित है, जिससे आमजन को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। भीषण गर्मी के बीच पानी की कमी ने लोगों की दिनचर्या को पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है।

स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि नगर निगम के पानी पंप हाउस से सप्लाई में पारदर्शिता का अभाव है। कुछ चुनिंदा क्षेत्रों को प्राथमिकता दी जा रही है, जबकि कई मोहल्लों को लंबे इंतजार के बाद भी पर्याप्त पानी नहीं मिल पा रहा है

सबसे गंभीर आरोप यह सामने आ रहा है कि पीएचई सभापति द्वारा अपने ही वार्ड में पहले पानी की सप्लाई सुनिश्चित की जा रही है। शहर के सभापति होने के बावजूद उनका ध्यान पूरे नगर पर समान रूप से नहीं है, बल्कि अपने क्षेत्र को प्राथमिकता देने की बात कही जा रही है

लोगों का कहना है कि जब एक जनप्रतिनिधि पूरे शहर का जिम्मेदार होता है, तो उससे निष्पक्षता और समान व्यवहार की अपेक्षा की जाती है। लेकिन वर्तमान स्थिति में यह आरोप लग रहा है कि सभापति केवल अपने विशेष क्षेत्र का ही अधिक ख्याल रख रहे हैं, जिससे अन्य वार्डों के साथ अन्याय हो रहा है।

स्थिति को और बिगाड़ने वाली बात यह है कि नगर निगम का एक पानी टैंकर पिछले 10 दिनों से खराब पड़ा हुआ है। इसके बावजूद उसे सुधारने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है, जिससे पानी की आपूर्ति और प्रभावित हो गई है।

स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पावर हाउस में खड़ी पानी सप्लाई की एक गाड़ी पिछले कई दिनों से खराब पड़ी है, लेकिन उसे दुरुस्त कराने या उसकी सुध लेने तक का समय भी पीएचई सभापति के पास नहीं है। ऐसे हालात में सवाल उठना लाजिमी है कि जब मूलभूत संसाधनों की ही अनदेखी की जा रही है, तो शहर की जल व्यवस्था आखिर कैसे सुचारू रह पाएगी।

पीने के पानी के लिए लोग इधर-उधर भटकने को मजबूर हैं। कई परिवार निजी टैंकरों से पानी मंगवा रहे हैं, जिससे उन पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है। आम जनता में इस स्थिति को लेकर गहरा आक्रोश है।

इस पूरे मामले में एक ओर जहां महापौर गली-मोहल्लों में पहुंचकर व्यवस्थाओं का जायजा ले रहे हैं और जमीनी स्तर पर समस्याओं के समाधान की कोशिश कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ सभापति का यह रवैया लोगों को बिल्कुल रास नहीं आ रहा है।

लोगों का यह भी मानना है कि सभापति की कार्यशैली कहीं न कहीं महापौर की साफ-सुथरी और स्पष्टवादी छवि को भी नुकसान पहुंचा रही है। यदि इसी तरह पक्षपात और लापरवाही जारी रही, तो इसका सीधा असर नगर निगम की समग्र छवि पर पड़ेगा।

नगर निगम की इस कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। जनता ने प्रशासन से मांग की है कि पानी वितरण में समानता लाई जाए, खराब टैंकर को तुरंत ठीक किया जाए और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए, ताकि शहरवासियों को राहत मिल सके।

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