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छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का बड़ा फैसला – अमित जोगी को उम्रकैद

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने बहुचर्चित रामअवतार जग्गी हत्याकांड में बड़ा फैसला सुनाते हुए अमित जोगी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। यह मामला साल 2003 का है, जिसने उस समय प्रदेश की राजनीति में भारी हलचल मचा दी थी।

रामअवतार जग्गी, जो एनसीपी के प्रमुख नेता थे, की 4 जून 2003 को गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। यह घटना उस समय हुई जब छत्तीसगढ़ की राजनीति अपने चरम पर थी और कई बड़े राजनीतिक टकराव सामने आ रहे थे।

शुरुआत में इस हत्याकांड को साधारण आपराधिक घटना या लूट से जुड़ा मामला माना गया था, लेकिन बाद में जांच की दिशा बदल गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंप दी गई।

सीबीआई जांच में इस हत्याकांड को एक सुनियोजित राजनीतिक साजिश बताया गया। जांच एजेंसी ने दावा किया कि हत्या के पीछे राजनीतिक कारण थे और इसे एक सोची-समझी रणनीति के तहत अंजाम दिया गया।

इस मामले में अमित जोगी का नाम सामने आया, जो उस समय के मुख्यमंत्री अजीत जोगी के पुत्र हैं। जांच में उन्हें साजिश का मुख्य सूत्रधार बताया गया, जिसके बाद उनके खिलाफ आरोप तय किए गए।

हालांकि, 2007 में निचली अदालत (ट्रायल कोर्ट) ने अमित जोगी को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया था। इस फैसले के बाद मामला काफी समय तक शांत रहा, लेकिन बाद में इस निर्णय को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई।

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के फैसले की समीक्षा करते हुए उसे गलत ठहराया। अदालत ने कहा कि उपलब्ध साक्ष्यों का सही तरीके से मूल्यांकन नहीं किया गया था और बरी करने का निर्णय न्यायसंगत नहीं था।

हाईकोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट कहा कि अमित जोगी इस हत्याकांड के मास्टरमाइंड हैं। अदालत ने भारतीय दंड संहिता की धारा 302 (हत्या) और 120बी (आपराधिक साजिश) के तहत उन्हें दोषी करार दिया।

इस मामले में कई अन्य आरोपी भी थे, जिनमें से कुछ को पहले ही सजा मिल चुकी है। यह केस लंबे समय तक चला और इसमें कई महत्वपूर्ण गवाहों और साक्ष्यों की भूमिका रही।

फैसले के बाद अमित जोगी ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। अब इस मामले में अंतिम फैसला सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के बाद ही तय होगा, लेकिन फिलहाल हाईकोर्ट के इस निर्णय ने एक बार फिर इस पुराने मामले को चर्चा में ला दिया है।

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