कांकेर जिले के माओवादी दारसु सोरी को लेकर उसके परिवार ने भावुक अपील करते हुए उसे मुख्यधारा में लौट आने की गुहार लगाई है। सरकार द्वारा माओवादियों के लिए 31 मार्च तक आत्मसमर्पण की डेडलाइन तय किए जाने के बीच परिजनों की यह अपील चर्चा का विषय बन गई है।
परिवार के सदस्यों का कहना है कि वे दारसु सोरी को सुरक्षित और सामान्य जीवन जीते हुए अपने बीच देखना चाहते हैं। कई वर्षों से उसके माओवादी संगठन में शामिल रहने के कारण पूरा परिवार लगातार डर और चिंता के माहौल में जी रहा है।
दारसु सोरी के भतीजे जगत सोरी ने भावुक शब्दों में कहा….सरेंडर कर दो, घर में हम अकेले पड़ गए हैं। खेती करने वाला भी कोई नहीं है। अब घर की जिम्मेदारी संभालने वाला कोई नहीं बचा है। अगर दारसु वापस आ जाएंगे तो सब कुछ ठीक हो जाएगा।”
उन्होंने यह भी कहा कि सरकार आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों को पुनर्वास और बेहतर जीवन का अवसर दे रही है। ऐसे में हिंसा का रास्ता छोड़कर घर लौटना ही सबसे सही फैसला होगा।
परिजनों के अनुसार जंगल की जिंदगी हमेशा खतरे से भरी होती है, जबकि मुख्यधारा में लौटने पर सुरक्षित भविष्य और सम्मानजनक जीवन मिल सकता है।
स्थानीय लोगों का भी मानना है कि 31 मार्च की डेडलाइन से पहले दारसु सोरी जैसे युवाओं को आत्मसमर्पण कर समाज की मुख्यधारा में लौटना चाहिए, ताकि बस्तर क्षेत्र में शांति और विकास को और मजबूती मिल सके। अब देखना होगा कि परिवार की यह भावुक अपील दारसु सोरी पर कितना असर डालती है।
कांकेर में माओवादी दारसु सोरी के लिए परिवार की भावुक अपील “हथियार छोड़कर घर लौट आओ”

