प्रयागराज: Allahabad High Court ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि यदि किसी व्यक्ति की शादी पहले से वैध रूप से कायम है, तो वह किसी अन्य व्यक्ति के साथ लिव-इन रिलेशनशिप में रहते हुए कानूनी संरक्षण (legal protection) का दावा नहीं कर सकता।
क्या है मामला?
कोर्ट के सामने एक याचिका आई थी, जिसमें एक पुरुष और महिला ने अपने लिव-इन संबंध को सुरक्षा देने की मांग की थी। लेकिन जांच में सामने आया कि पुरुष पहले से शादीशुदा है और उसकी पत्नी के साथ वैवाहिक संबंध अभी भी कानूनी रूप से खत्म नहीं हुए हैं।
कोर्ट की टिप्पणी
हाई कोर्ट ने कहा: विवाह एक वैध और संरक्षित संस्था है,जब तक शादी कानूनी रूप से समाप्त (तलाक) नहीं होती, तब तक दूसरा संबंध “अवैध” माना जाएगा
ऐसे रिश्तों को कानून का संरक्षण देना वैवाहिक कानूनों के खिलाफ होगा
कोर्ट का साफ संदेश
कोर्ट ने दो टूक कहा कि: “शादी रहते हुए किसी अन्य महिला/पुरुष के साथ लिव-इन रिलेशनशिप को कानून संरक्षण नहीं दे सकता।”
क्या मतलब है इस फैसले का?
शादीशुदा व्यक्ति अगर किसी और के साथ लिव-इन में रहता है, तो उसे पुलिस सुरक्षा या कानूनी संरक्षण नहीं मिलेगा।ऐसे रिश्ते को कानून वैध नहीं मानेगा,इससे भविष्य में ऐसे मामलों पर स्पष्ट दिशा-निर्देश मिलेंगे


