अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर विशेष रिपोर्ट
जगदलपुर। हर वर्ष अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर महिला सशक्तिकरण और समान अधिकारों की चर्चा पूरे विश्व में होती है। इसी कड़ी में छत्तीसगढ़ के बस्तर जिला से महिलाओं की सुरक्षा और पुनर्वास की एक सकारात्मक तस्वीर सामने आई है। महिला एवं बाल विकास विभाग, छत्तीसगढ़ द्वारा जगदलपुर में संचालित ‘सखी वन स्टॉप सेंटर’ संकटग्रस्त महिलाओं के लिए राहत, सुरक्षा और न्याय का भरोसेमंद केंद्र बनकर उभरा है।
योजना के प्रारंभ से लेकर 31 जनवरी 2026 तक के उपलब्ध आँकड़े बताते हैं कि यह केंद्र केवल एक प्रशासनिक व्यवस्था नहीं, बल्कि हिंसा, शोषण और मानसिक प्रताड़ना से जूझ रही महिलाओं के लिए सहारा और पुनर्वास का मजबूत मंच बन चुका है। इस अवधि में केंद्र में कुल 1862 प्रकरण दर्ज किए गए, जिनमें से 1849 मामलों का सफलतापूर्वक निराकरण किया जा चुका है। इन आँकड़ों से स्पष्ट है कि ‘सखी’ केंद्र ने बड़ी संख्या में महिलाओं के जीवन में नई उम्मीद और आत्मविश्वास का संचार किया है।
बहुआयामी सहायता से मिला संबल
‘सखी वन स्टॉप सेंटर’ की सफलता के पीछे महिलाओं को दी जाने वाली बहुआयामी सहायता की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। केंद्र में आने वाली महिलाओं को केवल एक प्रकार की सहायता नहीं, बल्कि उनकी परिस्थितियों के अनुसार समग्र सहयोग प्रदान किया जाता है।
आंकड़ों के अनुसार, सबसे अधिक महिलाओं को मनोवैज्ञानिक परामर्श (काउंसलिंग) के माध्यम से राहत मिली है। अब तक 1225 महिलाओं को मानसिक तनाव और आघात से उबरने के लिए विशेषज्ञ परामर्श उपलब्ध कराया गया, जिससे वे दोबारा आत्मविश्वास के साथ सामान्य जीवन की ओर लौट सकीं।
इसके अलावा संकटग्रस्त महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए केंद्र में 763 महिलाओं को सुरक्षित आश्रय प्रदान किया गया। कई मामलों में यह अस्थायी आश्रय उनके लिए जीवनरक्षक साबित हुआ, जहाँ उन्हें सुरक्षित वातावरण, भोजन और आवश्यक देखभाल उपलब्ध कराई गई।
कानूनी और पुलिस सहायता भी प्रभावी
महिलाओं को न्याय दिलाने के लिए केंद्र ने विधिक सहायता के क्षेत्र में भी सक्रिय भूमिका निभाई है। अब तक 471 महिलाओं को कानूनी परामर्श और सहायता प्रदान कर उन्हें न्यायिक प्रक्रिया में सहयोग दिया गया। वहीं 84 महिलाओं को पुलिस सहायता उपलब्ध कराई गई, जिससे उनके मामलों में त्वरित कार्रवाई संभव हो सकी।
स्वास्थ्य संबंधी आपात स्थितियों में भी केंद्र तत्पर रहा है। अब तक 42 महिलाओं को तत्काल चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराकर उनकी स्वास्थ्य सुरक्षा सुनिश्चित की गई।
वर्ष 2026 की शुरुआत भी रही सक्रिय
नए वर्ष की शुरुआत में भी ‘सखी’ केंद्र की सक्रियता बनी हुई है। जनवरी 2026 के दौरान ही केंद्र में 42 नए मामले दर्ज हुए, जिनमें से 35 मामलों का त्वरित निराकरण कर पीड़ित महिलाओं को राहत दी गई।
इस एक महीने के भीतर ही 8 महिलाओं को मनोवैज्ञानिक परामर्श, 8 महिलाओं को सुरक्षित आश्रय और 4 महिलाओं को विधिक सहायता प्रदान की गई। इससे यह स्पष्ट होता है कि केंद्र लगातार संवेदनशीलता और तत्परता के साथ महिलाओं की मदद कर रहा है।
बस्तर की महिलाओं के लिए भरोसे की ‘सखी’
आज जगदलपुर स्थित ‘सखी वन स्टॉप सेंटर’ केवल एक सरकारी संस्था नहीं, बल्कि बस्तर की महिलाओं के लिए भरोसेमंद साथी के रूप में स्थापित हो चुका है। कठिन परिस्थितियों में यह केंद्र पीड़ित महिलाओं के साथ खड़े होकर उन्हें सुरक्षा, न्याय और सम्मानजनक जीवन की दिशा देता है।
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर यह रिपोर्ट न केवल विभाग की प्रतिबद्धता और संवेदनशीलता को दर्शाती है, बल्कि बस्तर की उन साहसी महिलाओं को भी सलाम करती है जिन्होंने अन्याय और हिंसा के खिलाफ आवाज उठाकर ‘सखी’ का हाथ थामा और अपने जीवन में बदलाव की नई शुरुआत की।
बस्तर की महिलाओं के लिए ‘सखी’ बना सुरक्षा का मजबूत कवच

