जगदलपुर।अगर हौसले बुलंद हों और सही मार्गदर्शन मिल जाए, तो छोटे गांवों की बेटियां भी अपनी तकदीर खुद लिख सकती हैं। बस्तर जिले के तीरथगढ़ गांव की अनीता कश्यप ने इसका जीता-जागता उदाहरण पेश किया है। ‘बिहान’ योजना और एकीकृत खेती (इंटीग्रेटेड फार्मिंग) मॉडल के सहारे अनीता आज एक सफल ‘लखपति दीदी’ बन चुकी हैं।
अनीता कश्यप का जीवन पहले काफी संघर्षों से भरा हुआ था। उनके पिता परदेशी राम के पास केवल तीन एकड़ जमीन थी, जिस पर पारंपरिक तरीके से साल में एक ही फसल होती थी। सीमित आय के कारण परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर थी और अनीता को अपनी बड़ी बहन के घर रहकर जीवन यापन करना पड़ा।
साल 2022 में अनीता के जीवन में बड़ा बदलाव तब आया जब वे लाल हजारी स्व-सहायता समूह से जुड़ीं। समूह से जुड़ने के बाद उन्हें न सिर्फ आत्मविश्वास मिला, बल्कि इंटीग्रेटेड फार्मिंग क्लस्टर परियोजना के माध्यम से आधुनिक और वैज्ञानिक खेती के तरीके सीखने का अवसर भी मिला।
आर्थिक संसाधनों की कमी को दूर करने के लिए अनीता को चरणबद्ध तरीके से वित्तीय सहयोग भी मिला। शुरुआत में उन्हें 4 हजार रुपये का रिवॉल्विंग फंड और 10 हजार रुपये की सामुदायिक निवेश निधि प्राप्त हुई। इसके बाद उन्होंने 60 हजार रुपये का बैंक लोन लिया और इंटीग्रेटेड फार्मिंग क्लस्टर परियोजना के तहत 1.50 लाख रुपये का उद्यमी ऋण भी प्राप्त किया।
इन संसाधनों का सही उपयोग करते हुए अनीता ने सब्जी उत्पादन, मुर्गी पालन और ब्रीडिंग यूनिट को एक साथ शुरू किया। मेहनत और बेहतर प्रबंधन के चलते आज उनका व्यवसाय सफल हो चुका है।
अनीता ने सब्जी उत्पादन से करीब 1.65 लाख रुपये, मुर्गी पालन से 2.55 लाख रुपये और ब्रीडिंग यूनिट से 65 हजार रुपये की आय अर्जित की है। इस तरह उन्होंने लगभग 5 लाख रुपये का टर्नओवर हासिल कर लिया है।
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर अनीता कश्यप की यह सफलता की कहानी महिला सशक्तिकरण का प्रेरक उदाहरण बन गई है। यह कहानी बताती है कि सही सरकारी योजनाओं, मार्गदर्शन और दृढ़ इच्छाशक्ति के साथ ग्रामीण क्षेत्र की महिलाएं भी आत्मनिर्भर बनकर अपने परिवार और समाज की आर्थिक स्थिति बदल सकती हैं।
बस्तर की अनीता कश्यप बनीं ‘लखपति दीदी’, बिहान योजना और एकीकृत खेती से बदली किस्मत

